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Tuesday, August 22, 2017

छात्र तय करेंगे गुरुजी फेल या पास: अब परफॉरमेंस से जुड़ेगी सरकारी शिक्षा, राइट टू एजुकेशन नियमावली में किया जाएगा संशोधन

नौनिहालों के भविष्य के सुनहरे ख्वाब संजोकर उन्हें सरकारी विद्यालयों में भेजने वाले अभिभावकों को अब मन मसोसकर नहीं रह जाना होगा। कक्षा एक से आठवीं तक बच्चों को विषयवार कितना सीखना चाहिए और उनके ज्ञान का स्तर क्या है, इसके लिए बकायदा उन्हें भी ब्रोशर के जरिए पाठ्यक्रम की जानकारी दी जाएगी। राज्य
सरकार बच्चों के सीखने की परफॉरमेंस को अब शिक्षकों की परफॉरमेंस से जोड़ने जा रही है। यानी सरकारी विद्यालयों में गुरुजी की परफॉरमेंस छात्र तय करने जा रहे हैं। इसके लिए सरकार निश्शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार (आरटीई) नियमावली में संशोधन करने जा रही है। संशोधित नियमावली में छात्र-छात्रओं के लर्निंग आउटकम के लिए शिक्षकों को जवाबदेह बनाने को बकायदा कानूनी शक्ल दी जा रही है।

सरकारी विद्यालयों में कक्षा एक से आठवीं तक शिक्षा की गुणवत्ता पर अंगुली उठती रही हैं। राज्य स्तर पर शिक्षा महकमे की ओर से किए जा रहे सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (सीसीई), अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की ओर से लर्निग लेवल असेसमेंट और राष्ट्रीय स्तर पर ‘प्रथम’ संस्था की ओर से किए गए सर्वेक्षण में कक्षा एक से आठवीं तक बच्चों की पढ़ाई के स्तर की भयावह तस्वीर कई मर्तबा सामने आ चुकी है। भाषा, गणित और अन्य विषयों में कक्षावार बच्चे न्यूनतम ज्ञान भी हासिल नहीं कर पा रहे हैं। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने भी आरटीई नियमावली में अब कक्षा एक से आठवीं तक लर्निग इंडीकेटर्स को अब लर्निंग आउटकम से जोड़ने का फरमान राज्यों को सुना दिया है। केंद्र की तर्ज पर उत्तराखंड राज्य ने भी आरटीई नियमावली में संशोधन की तैयारी कर ली है। संशोधित नियमावली का मसौदा कैबिनेट की अगली बैठक में रखा जाएगा। लर्निग आउटकम यानी पढ़ाने के बाद उसका प्रतिफल क्या रहा, इसे नियमावली के जरिए जवाबदेही से जोड़ा जा रहा है। यह हंिदूी, अंग्रेजी, गणित, व पर्यावरण अध्ययन समेत तमाम विषयों के लिए लागू होगा। नियमावली में संशोधन के बाद बच्चों के विषयवार न्यूनतम ज्ञान को लेकर शिक्षकों की जवाबदेही तय हो जाएगी। इसे शिक्षा की गुणवत्ता के लिए अहम कदम माना जा रहा है।

खास बात ये है कि ी बार इस नई व्यवस्था के लिए कक्षा एक से आठवीं तक अभिभावकों के लिए भी ब्रोशर तैयार किए गए हैं। इसमें उन्हें भी पाठ्यक्रम की जानकारी दे बताया गया है कि कक्षावार बच्चे को कितना आना चाहिए। ब्रोशर के चलते मास्साब को भी अभिभावकों को चलताऊ जवाब देना शायद ही मुमकिन हो। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय का कहना है कि नियमावली में संशोधन के बाद सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार नजर आएगा।

सरकारी स्कूलों में पढ़ाएंगे रिटायर्ड शिक्षक

देहरादून: सरकारी स्कूलों में अध्यापकों की कमी दूर करने के लिए राज्य सरकार ने नया फामरूला निकाला है। इन स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई को सुचारु रखने के लिए स्थानीय स्तर पर सेवानिवृत्त अध्यापकों और शिक्षाविदों की सेवा ली जाएगी। शिक्षा निदेशक आरके कुंवर ने अपर निदेशक गढ़वाल व कुमाऊं मंडल को इस बावत आदेश जारी किए हैं। शासनादेश में दी गई व्यवस्था के अनुसार कार्रवाई को कहा है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है। यहां तक कि कई स्कूल अभी भी एकल शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। ऐसे में विभाग अब रिटायर्ड शिक्षकों व शिक्षाविदों की मदद लेगा। इसका मूल उद्देश्य शिक्षा का उत्थान और बच्चों की पढ़ाई सुचारु रखना है। सेवानिवृत्त अध्यापकों की ऐच्छिक सेवाएं ली जाएंगी। इससे अध्यापक भी सेवानिवृत्ति के बाद अपने समय का सदुपयोग कर पाएंगे। बच्चों और नए अध्यापकों को भी उनके जीवन भर के अनुभव का लाभ मिल सकेगा। ये सेवानिवृत्त अध्यापक अवैतनिक तौर पर अपनी सेवाएं देंगे। शिक्षा निदेशक ने बताया कि इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इच्छुक सेवानिवृत्त अध्यापक व शिक्षाविद् स्थानीय स्तर पर स्कूलों में अपनी सुविधा के अनुसार सेवाएं दे सकते हैं।’

>>अभिभावकों को ी बार ब्रोशर देकर कक्षावार पाठ्यक्रम की मिलेगी जानकारी


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छात्र तय करेंगे गुरुजी फेल या पास: अब परफॉरमेंस से जुड़ेगी सरकारी शिक्षा, राइट टू एजुकेशन नियमावली में किया जाएगा संशोधन Rating: 4.5 Diposkan Oleh: amit gangwar

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