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Aug 24, 2017

गुरुजनों की अनूठी सोच ने बदल दी सरकारी स्कूलों की तस्वीर

- सरकारी स्कूलों में नवाचार का इस्तेमाल करने वाले 46 शिक्षकों का हुआ सम्मान लखनऊ। कार्यालय संवाददाता एक नई सोच दुनिया बदल सकती है। यह कई बार सुना होगा। लेकिन, राजधानी समेत प्रदेश के कई सरकारी स्कूलों के गुरुजनों ने इसे अपने जीवन में लागू किया। अपने स्कूलों में छोटे-छोटे बदलाव किए। उनके
इन प्रयासों का नतीजा है कि सरकारी स्कूलों की सूरत बदलने लगी। राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) और स्टर एजुकेशन ने गुरुवार को ‘टीचर चेंजमेकर समिट-2017 में परिषदीय विद्यालयों में पढ़ाने वाले 502 शिक्षकों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम लाल बहादुर शास्त्री गन्ना किसान संस्थान, लखनऊ के सभागार में हुआ। जहां, प्रदेश के विभिन्न जिलों से 46 शिक्षकों के नवाचारों की पुस्तिका ‘नवोन्मेष-2017 का विमोचन भी किया गया। नवाचार करने वाले लखनऊ, कानपुर नगर, रायबरेली, उन्नाव और फैजाबाद ज़िले के 502 शिक्षकों को द्वारा प्रमाण पत्र देकर सम्मानित भी किया गया। इस कार्यक्रम में 148 शिक्षकों को नवाचार के लिए रोहैम्पटन यूनिवर्सिटी, लंदन का प्रमाण पत्र भी दिया गया। कार्यक्रम में एससीईआरटी, लखनऊ के निदेशक डॉ. सर्वेन्द्र विक्रम बहादुर सिंह और संयुक्त निदेशक अजय सिंह के साथ-साथ स्टर एजुकेशन के राष्ट्रीय निदेशक संदीप मिश्रा समेत कई जिलों से आए शिक्षक मौजूद रहे।
बच्चों की सीखने पर दें जोर : डॉ. सर्वेन्द्र विक्रम एससीईआरटी के निदेशक डॉ. सर्वेन्द्र विक्रम बहादुर सिंह ने शिक्षकों से कहा कि शिक्षकों को अपने हर एक प्रयास और मेहनत को करते समय बच्चों के सीखने की प्राथमिकता का ध्यान रखना चाहिए। कक्षा में पढ़ाते समय तकनीकी से जुड़े हुए नवाचारों को भी बढ़ावा दें। एससीईआरटी ने शिक्षकों की प्रोफ़ेशनल लर्निंग कम्युनिटी बनायी है, जिसमें विभिन्न विषयों के शिक्षक एक-दूसरे के साथ विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। (बॉक्स) खेल-खेल में बढ़ गई स्कूल में छात्रों की संख्या प्राइमरी स्कूल धावां चिनहट की शिक्षिका पूनम गौतम ने खेल-खेल में स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ी दी। बच्चों के बोलने में डर, झिझक को दूर कर उनकी सहभागिता बढ़ाने पर जोर दिया। इसके लिए बच्चों के लिए ग्रुप एक्टीविटीज को बढ़ाया। प्रत्येक दिन कुछ बच्चों से प्रार्थना करवाई। पूनम ने पढ़ाई के तौर तरीकों को बदलकर दिलचस्प बनाया। जिससे बच्चे आकर्षित हुए। नतीजा छात्रों की उपस्थिति के साथ संख्या भी बढ़ गई। प्राइमरी स्कूल विश्रामखेड़ा की प्रधानाध्यापिका अल्का श्रीवास्तव ने बच्चों में पढ़ाई गई विषय वस्तु को स्थायी रूप देने के लिए नवाचार का इस्तेमाल किया।
वर्ड मीनिंग बाय पोयम : पूर्व माध्यमिक विद्यालय मलहा की सहायक अध्यापिका उमा आर्या ने बच्चों को अंग्रेजी शब्दों को सिखाने के लिए नायाब तरीका निकाला। उन्होंने अंग्रेजी के शब्दों को कविता में पिरोया। जैसे फोरेस्ट माने जंगल जिसमें रहते जानवर...। नतीजा 60 प्रतिशत बच्चे सरलता से शब्दों के सीखने लगे। प्राइमरी स्कूल मलेसेमऊ की सहायक अध्यापिक रचना मेहंदीरत्ना ने फन टुगेदर एण्ड लर्न टूगेदर और पूर्व माध्यमिक विद्यालय भद्दीशीर्स मोहनलालगंज के डॉ. राधे कान्त चतुर्वेदी ने बच्चों को सिखाने के लिए क्रियाशील मॉडल का इस्तेमाल किया। इसी तरह प्राइमरी स्कूल मल्हौर प्रथम की संगीता राय ने चार्ट पर अक्षर लिखकर अभ्यास कराने पर जोर दिया। प्राइमरी स्कूल नौबस्ता कलां की डॉ. अमिता वर्मा ने बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए नवाचार को अपनाया तो प्राइमरी स्कूल गढ़ी कनकहा की रीना चौधरी ने स्वच्छता के प्रति जागरूकता को बढ़ावा दिया।

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गुरुजनों की अनूठी सोच ने बदल दी सरकारी स्कूलों की तस्वीर Rating: 4.5 Diposkan Oleh: amit gangwar

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