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सौ बात की एक बात: जब दिल्ली आने से खुद ही की मनाही तो हम क्यों करें सहयोग: राजेश गुप्ता संयोजक (सयुंक्त शिक्षामित्र सघंर्ष समिति एटा)

*सौ बात की एक बात*
*जब दिल्ली आने से खुद ही की मनाही तो हम क्यों करें सहयोग*
जब गाजी जी व शाही जी को एवं उनके पदाधिकारीयों को दिल्ली
धरना में आने की खुली मनाही थी कि यदि गाजी शाही अथवा इनका कोई भी पदाधिकारी दिल्ली धरने में आता है तो पुलिस से दंगाई का आरोप लगा कर गिरफ्तार करा देंगे ।

तो क्या हम लोग आकर अपमानित होते । दूरस्थ B T C सघं के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं हाल ही में बने प्रांतीय संरक्षक दक्ष यादव की हुई मोबाइल पर बात सुनिए साफ हो जाएगा ।
जबकि दिल्ली धरना में अन्ना हजारे जी को गुमराह कर रोकने का षणयन्त्र गाजी जी व शाही जी ने नहीं बल्कि किसी टैटूए ने रचा था उसकी भी अन्ना हजारे के P A से हुई बात को गौर से सुनिए तब सोचना कि आखिर शिक्षामित्रों को कौन गुमराह करता है ।
और दक्ष यादव एवं किसी अन्य पदाधिकारी ने बदनाम किया गाजी व शाही को ।
एक बात और जब मुख्यमंत्री महोदय ने हमारी गम्भीरता को दृष्टिगत रखते हुए तीन दिन का समय लिया है तो क्या मुख्यमंत्री लखनऊ से तीन दिन बात भाग जाएंगे या हम लखनऊ नहीं जा पाएँगे ।
लखनऊ में हुए विशाल ऐतिहासिक सफल सत्याग्रह एवं आंदोलन के दवाव में जो मुख्यमंत्री से हमारी बात हुई थी उसी के अनुरूप 28 अगस्त सोमवार को महत्वपूर्ण वैठक कर निर्णय होने जा रहा है ।
और कितनी तेजी से काम चाहते हो आप लोग जो पल भर में भटक जाते हो ।
जो लोग यह कह रहे हैं कि गाजी शाही ने अध्यादेश की बात नहीं की तो आप बताएँ कि NCTE को पत्र लिखकर शिक्षामित्रों को टैट से छूट देने अथवा टैट में पासिंग मार्क में भारी छूट देने की सिफारिश राज्य सरकार करेगी तो क्या यह कुछ भी सफलता नहीं है ।
अगर बात आती है कि आश्रम पद्धति पर आधारित व्यवस्था की तो क्या यह सम्मान जनक रास्ता नहीं है जब तक हम सभी स्थाई शिक्षक नहीं बन जाते।
सुप्रीम कोर्ट में पुनः बिचार याचिका हमारे सगंठन द्वारा एवं प्रान्तीय अध्यक्ष गाजी जी द्वारा दो याचिका आखिरी उम्मीद की आस से दायर की जा चुकी हैं ।
हमारे विवाद को भली भाँति जानने बाले सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश दीपक मिश्रा जी आज ही मुख्य न्यायाधीश बने हैं । जिनसे हम नाउम्मीद नहीं हो सकते हैं ।
रही बात शिक्षामित्रों को दिल्ली जाने से रोकने की तो मैं स्पष्ट करना चाहता हूँ कि ऐसी ओछी एवं निम्न मानसिकता की हरकतें मेरे जमीर में नहीं हैं । यदि मैं ऐसा चाहता तो एटा से जो भी 40-45 शिक्षामित्र साथी दिल्ली गए उनमे से मुश्किल से 10-15 ही जाते ।
जबकि हाल ही में मनोनीत प्रांतीय संरक्षक बड़े भाई दक्ष यादव जी अपने जिले से गिने चुने 60-70 शिक्षामित्रों को ही ले जा पाए । यह बहुत ही सोचनीय बिषय है।
इसलिए मैंने न तो किसी को न जाने के लिए फौन किया , न ही मैंने SMS कराए , न ही ऐसी कोई पोस्ट जारी की और न ही अखबार में विज्ञप्ति जारी की ।
इसीलिए भी हमारे कुछ साथियों को बिना किसी सच्चाई जाने ऐसा आरोप प्रतयारोप नहीं लगाना चाहिए।
अन्त में केवल इतना ही कहूंगा कि ईश्वर दिल्ली का धरना सफल करें ।
आप दिल्ली से जीत कर आएँ और हमारे 172000 शिक्षामित्रों के लिए अध्यादेश लेकर आएं ।
बैसे इतना भी ध्यान रखें कि लखनऊ के सत्याग्रह - धरना प्रदर्शन एवं आंदोलन की सफलता हमारे नजदीक है जिसकी तस्वीर आप सभी के सामने सोमवार 28 अगस्त को सामने होगी।
इसी शुभकामनाएँ के साथ आपका
*राजेश गुप्ता*
*संयोजक*
*सयुंक्त शिक्षामित्र सघंर्ष समिति एटा*
*----------------------------------------------*
*मंडल अध्यक्ष -अलीगढ़*
*उ.प्र.प्राथमिक शिक्षामित्र संघ*







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सौ बात की एक बात: जब दिल्ली आने से खुद ही की मनाही तो हम क्यों करें सहयोग: राजेश गुप्ता संयोजक (सयुंक्त शिक्षामित्र सघंर्ष समिति एटा) Rating: 4.5 Diposkan Oleh: amit gangwar

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