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शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी के लिए लिपिक को बनाया ‘बलि का बकरा’, उच्च न्यायालय ने अवैध शिक्षकों की नियुक्ति में की टिप्पणी

सीतापुर : 16448 शिक्षक भर्ती में 13 शिक्षकों की अवैध नियुक्ति का मामला उच्च न्यायालय पहुंच गया है। लखनऊ खंड पीठ के न्यायाधीश ने शिक्षक भर्ती के लिए डायट प्राचार्य की अध्यक्षता वाली चयन समिति को जिम्मेदार माना है। यही नहीं, चयन समिति के जिम्मेदारों की नीयत पर सवाल उठाते हुए वादी को बलि का
बकरा बनाने की तल्ख टिप्पणी भी की है।
शिक्षक भर्ती में चयन समिति ने डीएड अभ्यर्थियों को सचिव के आदेश के बावजूद अवैधानिक तरीके से उपकृत करते हुए नियुक्ति दे दी थी। जिले में अभी तक 13 शिक्षक ऐसे पाए गए हैं, जिन्हें गलत तरीके से नियुक्ति पत्र जारी किया गया था। इस चयन समिति के अध्यक्ष डायट प्राचार्य अशोक कुमार तथा सचिव तत्कालीन बीएसए राजेंद्र सिंह समेत दो अन्य सदस्य शामिल थे। प्रकरण का खुलासा होने पर बीएसए ने नियुक्ति पटल सहायक नवल किशोर को प्रथम दृष्टया दोषी करार देते हुए निलंबित कर दिया था। 1निलंबन के विरुद्ध नवल किशोर ने उच्च न्यायालय की लखनऊ खंड पीठ में रिट याचिका दाखिल की। इस पर न्यायाधीश ने अवैध नियुक्ति के लिए चयन समिति को जिम्मेदार माना है। समिति ही अभ्यर्थियों के शैक्षिक प्रमाण पत्र के परीक्षण के लिए जिम्मेदार है। अदालत ने निदेशक बेसिक शिक्षा को प्रकरण का परीक्षण करते हुए 28 अगस्त को व्यक्तिगत हलफनामा देते हुए विभाग का रुख स्पष्ट करने का आदेश दिया है।’>>उच्च न्यायालय ने अवैध शिक्षकों की नियुक्ति में की टिप्पणी1’>>निदेशक को परीक्षण करने के निर्देश, मांगा व्यक्तिगत हलफनामा


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शिक्षक भर्ती में गड़बड़ी के लिए लिपिक को बनाया ‘बलि का बकरा’, उच्च न्यायालय ने अवैध शिक्षकों की नियुक्ति में की टिप्पणी Rating: 4.5 Diposkan Oleh: amit gangwar

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