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संस्था अवैध, विद्यालयों का संचालन फिर जारी: बोर्ड ऑफ हायर सेकेंडरी एजूकेशन दिल्ली के विद्यालयों का मामला

इलाहाबाद : यूपी बोर्ड की रिपोर्ट पर शासन बोर्ड ऑफ हायर सेकेंडरी एजूकेशन दिल्ली में अवैध घोषित कर चुका है लेकिन, प्रदेश के कई जिलों में इस संस्था के विद्यालय अब भी संचालित हैं। हर साल बड़ी संख्या में छात्र-छात्रएं निकल रहे हैं, जिन्हें प्रमाणपत्र अवैध होने का खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। सिपाही भर्ती 2015 में ही इन विद्यालयों से निकले 8107 अभ्यर्थियों को चयन सूची से बाहर किया गया है। यह अभ्यर्थी अब कोर्ट का दरवाजा
खटखटा रहे हैं। 1उत्तर प्रदेश में पुलिस सिपाही भर्ती 2015 दिसंबर माह में शुरू हुई। 34716 पदों के लिए 18 जनवरी से 12 फरवरी, 2016 तक आवेदन लिए गए। मेरिट में अव्वल आने वाले अभ्यर्थियों की आजमगढ़, बस्ती समेत अन्य स्थानों पर दौड़ व शारीरिक शिक्षा की परीक्षा हुई। इसमें उत्तीर्ण अभ्यर्थियों का अंतिम चयन के पहले शैक्षिक अभिलेखों की जांच हुई। शारीरिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले 8107 अभ्यर्थियों को इसलिए चयन से बाहर कर दिया गया, क्योंकि उनका इंटरमीडिएट का प्रमाणपत्र बोर्ड आफ हायर सेकेंडरी एजूकेशन दिल्ली का था और इस संस्था को शासन ने आठ मार्च 2014 को ही अवैध घोषित कर दिया था। इससे अभ्यर्थी परेशान हैं, वह समझ नहीं आ रहा है कि आखिर उनका कसूर क्या है। 1चयन से बाहर हुए अभ्यर्थियों ने बताया कि प्रदेश में इस संस्था के अब भी 209 विद्यालय विभिन्न जिलों में चल रहे हैं। स्कूल संचालक जल्द ही सब दुरुस्त होने का वादा भी कर रहे हैं। अभ्यर्थियों ने यह भी बताया कि संस्था अवैध होने के बाद भी उन संस्थाओं के विद्यालयों में पढ़ रहे छात्र-छात्रओं को कहीं समायोजित नहीं किया गया। यही नहीं, अब तक अवैध विद्यालयों से करीब दो लाख छात्र-छात्रएं निकल चुके हैं।1 ज्ञात हो कि यह संस्था 1969 से संचालित है और पहले यह यूपी बोर्ड के इंटरमीडिएट एजूकेशन एक्ट से संबंधित बोर्डो की सूची में 29वें नंबर पर रही है। पुलिस भर्ती से बाहर हुए अभ्यर्थी अंशू पाठक व महेंद्र यादव ने बताया कि उनका इसी संस्था का हाईस्कूल का प्रमाणपत्र मान्य और इंटर का प्रमाणपत्र अमान्य किया गया है। उन लोगों को संस्था फर्जी होने की जानकारी नहीं थी और तमाम जिलों में विद्यालय अब भी चल रहे हैं। पुलिस भर्ती बोर्ड के इन्कार के बाद उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।1 वहीं, यूपी बोर्ड के अफसरों का कहना है कि वह तय मेरिट पर संबंधित बोर्ड को अनुमन्य करते हैं, अवैध संस्था के विद्यालयों का संचालन रोकना जिला विद्यालय निरीक्षक व जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है।


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संस्था अवैध, विद्यालयों का संचालन फिर जारी: बोर्ड ऑफ हायर सेकेंडरी एजूकेशन दिल्ली के विद्यालयों का मामला Rating: 4.5 Diposkan Oleh: amit gangwar

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