वेबसाइट में सर्च करें

UPDATEMART वेबसाइट से फेसबुक पर जुडें

Sep 17, 2017

चमक ऐसी कि देखकर यूनीसेफ भी प्रभावित, अन्य स्कूलों का आइडियल बना प्राइमरी स्कूल मझरा गुलालपुर जाटोंवाला,

प्रधानाध्यापक अशोक की मेहनत रंग लाई
राघवेंद्र शुक्ल ’ सम्भल
जिले में कुछ लोग ऐसा काम कर जाते हैं जो बाकी के लिए आइडियल बन जाता है। कुछ ऐसा ही किया है
प्राइमरी स्कूल मझरा गुलालपुर जाटोंवाला के प्रधानाध्यापक अशोक कुमार ने। हरियाली व सफाई का एक ऐसा गठजोड़ इन्होंने यहां तैयार किया जो इसे बेस्ट बना देता है। बीते दिनों जब यूनिसेफ के स्टेट कोआíडनेटर पहुंचे तो उन्होंने भी कुछ ऐसी ही प्रतिक्रिया दे दी। इस स्कूल को आने वाले समय में पीएम के स्वच्छता अभियान में निश्चित तौर पर जगह मिल सकती है।
अमूमन सरकारी स्कूल की तस्वीर ऐसी सामने आती है जो दुखदायी होती है। पर प्राइमरी स्कूल गुलालपुर जाटों वाला सबसे अलग है। हरियाली से पूरी तरह सराबोर इस स्कूल में फूल, फल और विभिन्न तरह के पौधे हैं जो बच्चों को सुखद अनुभूति कराते हैं। ड्रेस में आने वाले बच्चे खुद भी सफाई को लेकर गंभीर हैं। शहर से तकरीबन पंद्रह किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्राइमरी स्कूल पर्यावरण संरक्षण की एक अलग ही तस्वीर दिखाता है। एरोकेरिया, साइकस, पाम, चाइनीज पाम, गुलाब, रात की रानी, मोर पंखी, आस्टेशियन, गोरा चोटी के अलावा तमाम पेड़ पौधे इस स्कूल की पहचान हैं। स्कूल में प्रवेश करते ही फूलों की महक मन को शीतलता का अहसास करा देती हैं। स्कूल की बाउंड्री में प्रवेश करने पर प्राइवेट व निजी का जो भेद अमूमन दिखता है वह गायब हो जाएगा। अंदर प्रवेश करते ही हरी हरी घास तथा उसके बगल में सीमेंटेड जमीन। जहां सफाई इतनी है कि आप बिना चप्पलों के लिए भी चल सकते हैं। मशीन से घासों की कटाई करते एक माली भी यहां मिलेगा और स्कूल अंदर विभिन्न आकार के जानवर बने पेड़ पौधे भी मन को बरबस को खींच लेंगे। इस स्कूल की एक सबसे बड़ी खासियत यहां हमेशा लाइट का होना है। यहां प्रधानाध्यापक अशोक कुमार ने अपने तनख्वाह से यहां न केवल इन्वर्टर लगाया है बल्कि सभी कमरों में पंखा और एलईडी भी लगाया। ताकि बच्चों को पढ़ने के दौरान कहीं से आभास न हो कि वह सरकारी स्कूल में हैं। 250 आबादी वाले इस छोटे से मझरे के इस स्कूल में वर्तमान समय में केवल 40 बच्चे हैं लेकिन सभी के सभी अनुशासित और पढ़ाई में अव्वल। चूंकि गांव कम आबादी का है। ऐसे में यहां केवल अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के बच्चे सबसे ज्यादा हैं लेकिन इन बच्चों को इस स्कूल में एक निजी स्कूल जैसा माहौल मिल जाता है। अशोक कुमार ने कहा कि वर्ष 2009 में स्कूल खुला। शिक्षा के मंदिर सबसे अलग और बेहतर बनाना मेरा उद्देश्य था। मैं इसमें कामयाब भी हो गया। इस स्कूल में आने के बाद सुखद अनुभूति होती है जिसे बयां नहीं किया जा सकता है। स्कूल को स्वच्छता के क्षेत्र में एक अलग पहचान दिलानी है। यह मेरा जुनून भी है। इस स्कूल का नाम प्रदेश स्तर पर हो और यहां आकर लोग देखे कि यह बच्चे निजी में नहीं सरकारी में हैं और सरकारी स्कूल भी बेहतर हो सकते हैं। एक सप्ताह पहले यूनिसेफ के राज्य समन्वयक अजय कुमार व एडीओ पंचायत गुरु दयाल सिंह भी आए थे और अपनी रिपोर्ट तैयार किए हैं। इस स्कूल को निश्चित तौर पर केंद्र या प्रदेश सरकार द्वारा सम्मानित करते हुए इसे आइडियल के रूप में पेश किया जाएगा।


uptet | up tet | uptet latest news | uptet news | only4uptet | primary ka master | basic shiksha parishad | basic siksha parishad | basic shiksha | shiksha mitra | shikshamitra latest news | shikshamitra news | uptet 2011 | uptet syllabus | uptet syllabus 2016 | uptetnews | uptet 2016 | uptet 2016 result | uptet result | uptet 2016 admit card | up basic shiksha parishad | shikshamitra

चमक ऐसी कि देखकर यूनीसेफ भी प्रभावित, अन्य स्कूलों का आइडियल बना प्राइमरी स्कूल मझरा गुलालपुर जाटोंवाला, Rating: 4.5 Diposkan Oleh: amit gangwar

0 comments:

Post a Comment

RELATED POSTS

updatemarts