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एक ज्वलंत प्रश्न: शिक्षामित्र का भविष्य और राज्य एवं केंद्र सरकार की भूमिका.............

एक ज्वलंत प्रश्न
शिक्षामित्र का भविष्य और राज्य एवं केंद्र सरकार की भूमिका.............
1 आश्रम पद्धति का मतलब आर्टिकल 14 एवं 16 का उल्लंघन मामला फिर से कोर्ट में
इसलिए सरकार नही करेगी
2 समान कार्य समान वेतन की शर्त है कि व्यक्ति का चयन उसी कैडर के समकक्ष पदों पर हुआ हो यहां संविदा कर्मी का तमगा फिर कोर्ट पहुंचा देगा इसलिए बहुत ही मुश्किल है सरकार इस ओर ध्यान दे
3 ncte पैरा 4 में संशोधन करे परंतु केंद्र सरकार ऐसा नही करेगी क्यूंकि तब पूरे देश मे भूचाल आ जायेगा
4 बिना tet फिर समायोजन की मांग पूर्णतया असंवैधानिक इसलिए ज्यादा कहने की जरुरत नही इस बिंदु पर
5 मानदेय की मांग 50000 प्रति माह सरकार के लिए संभव नही

अब आते है तर्क सम्मत बातो पर जो संभव भी है और कोर्ट का लफड़ा भी नही
1 राज्य सरकार चाहे तो sm पद को अध्यापक सेवा नियमावली में शामिल करें या sm की नई सेवा नियमावली बनाये क्यूंकि कोर्ट से हार का प्रमुख कारण sm का किसी भी कर्मचारी नियमावली में सम्मिलित ना होना ही है
2 सुप्रीम कोर्ट में ncte के पैरा 4 को आधार बनाकर एक याचिका दायर की जाए जिसमे ncte से स्पष्ट जवाब लिया जाए कि अनट्रेंड टीचर को परिभाषित करे उत्तर प्रदेश के संदर्भ में क्यूंकि 124000 sm को ncte ने अनट्रेंड टीचर की कैटेगरी में कुछ हद तक माना है
3 कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट के तहत एक समुचित एवं सम्मानजनक वेतन/मानदेय पूरे वर्ष का मांगा जाना चाहिए जो संभव है
4 राज्य सरकार से एक प्रस्ताव बनवाकर केंद्र को भेजा जाना चाहिए जिसमें sm की 17 वर्षो की सेवा के आधार पर एक संसोधन rte एक्ट में करवाया जाए जिससे सर्व शिक्षा अभियान के बाद भी उत्तर प्रदेश की शैक्षिक जरूरत के हिसाब से sm की आवश्यकता एवं उसके योगदान को परिभाषित किया जा सके ताकि sm को भविष्य में कोई नुकसान ना हो पाए

बाकी रही बात बिना टेट अध्यापक बनने की जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद किसी भी सरकार के लिए संभव नही इसलिए नेताओ पर दवाब बनाये कि उचित एवं संभव बिन्दुओ को शासन के समक्ष रखे अन्यथा sm को इतिहास बनने से कोई रोक नही पायेगा
शुभ रात्रि

एक ज्वलंत प्रश्न: शिक्षामित्र का भविष्य और राज्य एवं केंद्र सरकार की भूमिका............. Rating: 4.5 Diposkan Oleh: amit gangwar

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