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अस्थायी कर्मी पेंशन के हकदार: शीर्ष अदालत ने कहा, पेंशन से वंचित करना अन्यायपूर्ण

नई दिल्ली श्याम सुमन सरकारी विभागों में अस्थायी और वर्कचार्ज आधार पर काम कर रहे कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट ने भारी राहत दी है। सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि वर्कचार्ज या अस्थायी कर्मचारी को पेंशन के
लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। उसकी अस्थायी रूप से की गई सेवा को पेंशन देने के लिए जरूरी योग्य सेवा में जोड़ा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला हजारों अस्थायी कर्मियों को फायदा पहुंचाएगा जो बाद में स्थायी हुए लेकिन पेंशन के लिए योग्य सेवा पूरी नहीं कर सके। जस्टिस रंजन गोगोई और नवीन सिन्हा की पीठ ने यह फैसला देते हुए उत्तराखंड सरकार की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि एक बार वर्कचार्ज कर्मचारी की सेवा को स्थायी कर दिया गया तो उसे उन पेंशनरी लाभों से वंचित करने का कोई तर्क नजर नहीं आता जो अन्य जनसेवकों को नियमों के तहत उपलब्ध हैं। कानून में बराबरी के संरक्षण का मतलब बराबरी के नियमों का उन सभी लोगों के लिए एकसमान संरक्षण है जो एक समान स्थिति में हैं। ऐसे में संविधान का अनुच्छेद 14 (कानून के समक्ष बराबरी का अधिकार) इस पर वार करेगा, क्योंकि जो प्रावधान मनमाना है वह बराबरी को नकारात्मक कर देता है। यहां तक कि सरकार में अस्थायी और कार्यकारी सेवा को भी योग्यता सेवा का निर्धारण करने में गिना जाएगा।
यह बहुत बेतुका लगता है कि कर्मचारी की स्थायी होने से पहले वर्कचार्ज स्थापना में खर्च की गई सेवा को पेंशन के लिए गिनी जाने वाली सेवा में शामिल न किया जाए। - सुप्रीम कोर्ट की पीठ
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऐसे कर्मी जो पेंशन के लिए योग्य हैं तथा ऐसे कर्मी जो वर्कचार्ज व्यवस्था पर थे, जिनकी सेवा बाद में नियमित की गई, उनके बीच किया गया वर्गीकरण कानून की निगाह में टिकने लायक नहीं है। वर्कचार्ज कर्मचारी सेवा में नियमित होने पर अन्य जनसेवकों के स्तर पर आ जाता है। उसे पेंशन से वंचित करना न सिर्फ अन्यायपूर्ण है बल्कि मनमाना कृत्य भी होगा।
2014 के एक सर्वे के मुताबिक सरकारी क्षेत्र में कुल स्टाफ में से 43 } हिस्सा फ्लेक्सी स्टाफ यानी अस्थायी कर्मचारियों का है।1.23 करोड़ कर्मचारी पूरे देश में ऐसे हैं जो अलग-अलग सरकारी क्षेत्रों में अस्थायी अनुबंध पर काम कर रहे हैं।4.8 } बढ़े हैं अस्थायी कर्मचारी 2011-2013 के बीच। ( स्नेत - इंडियन स्टा¨फग फेडरेशन का सर्वे )
विधि के सामने सब बराबर - इसका अर्थ यह है कि राज्य सभी व्यक्तियों के लिए एक समान कानून बनाएगा और उन पर एक समान ढंग से उन्हें लागू भी करेगा। इसमें कानून के प्राधिकार की अधीनता सबके लिए समान है।


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अस्थायी कर्मी पेंशन के हकदार: शीर्ष अदालत ने कहा, पेंशन से वंचित करना अन्यायपूर्ण Rating: 4.5 Diposkan Oleh: amit gangwar

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