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Oct 11, 2017

बदल रहीं है स्थितियां, पढ़ाई के साथ अब खेलकूद भी

इलाहाबाद 1कहावत थी कि ‘पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब, जो तुम खेलोगे कूदोगे तो होगे खराब’। अब स्थितियां बदल गई हैं। आज बच्चों को पढ़ने के साथ खेलने कूदने के लिए प्रेरित किया जाता है, ताकि बच्चों की थकान या
तनाव कम हो सके। इसलिए स्कूलों में जितना पढ़ाई पर ध्यान दिया जाता है उतना बच्चों के खेलकूद पर भी। शहर में 70 फीसद स्कूल ऐसे हैं, जहां पर्याप्त मैदान ही नहीं है। फिर भी परिजनों से मोटी फीस वसूली जाती है। 1स्कूली बच्चों में शिक्षा और खेलकूद को निरंतर बढ़ावा दिया जा है। स्पोर्ट्स की नियमित कक्षाएं भी चलती हैं। अब नया विद्यालय खुलने की अनुमति उन्हीं को मिलती है, जिनके पास पर्याप्त मैदान होता है। छात्रएं स्वयं की सुरक्षा कर सकें इसके लिए उन्हें जूडो और ताइक्वांडो का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। मगर शहर में कई पुराने सहायता प्राप्त स्कूल हैं और वित्त विहीन स्कूल हैं उनमें अधिकांश में खेल का मैदान न होने से बच्चे खेलकूद में भाग नहीं ले पाते हैं। मगर स्पोर्ट्स के पीरियड चलाना बाध्यता है। मात्र 15 फीसद स्कूलों के पास ही खेलकूद के लिए पर्याप्त मैदान है। जहां पर आउट डोर की अधिकांश स्पर्धाएं हो सकती हैं। 1शिक्षकों की संख्या बढ़ाने की जरूरत : सरकारी स्कूल में कक्षा नौ से लेकर 12 तक प्रतिमाह खेलकूद के लिए पांच रुपये फीस ली जाती है, जबकि प्राइवेट स्कूल में 500 रुपये तक इस मद में जमा कराए जाते हैं। स्कूलों में गिनती के शारीरिक शिक्षक होते हैं। जनपद में यूपी बोर्ड के एक हजार, सीबीएसई व आइसीएसई के सेकेंड्री लेवल के 100 स्कूल हैं। इसमें से 60 फीसद स्कूली में ही स्पोर्ट्स टीचर हैं। बाकी कागजों पर हैं। स्कूलों में अंतर विद्यालयीय प्रतियोगिता होने तक खेलकूद की गतिविधियां चलती हैं। उसके बाद खेलकूद लगभग खत्म हो जाता है।1क्या है नियम : अगर यूपी बोर्ड का हाईस्कूल तक का स्कूल खोलना है तो शहर क्षेत्र में न्यूनतम 650 वर्गमीटर जमीन होना जरूरी है। उसमें 162 वर्ग मीटर क्रीड़ा स्थल होगा। ग्रामीण क्षेत्र में 2000 वर्ग मीटर जमीन स्कूल खोलने के लिए होनी चाहिए। इसमें 648 वर्गमीटर भूमि का खेल मैदान होना चाहिए। सीबीएसई का शहरी क्षेत्र में स्कूल खोलने के लिए लगभग 42 सौ वर्गमीटर ग्रामीण क्षेत्र में लगभग छह हजार वर्गमीटर भूमि होना जरूरी है। आइसीएसई का मानक भी इसके आसपास ही है। जिला विद्यालय निरीक्षक आरएन विश्वकर्मा का कहना है कि अब उन्हीं लोगों को स्कूल खोलने की अनुमति दी जाती है। जिनके पास न्यूनतम भूमि होती है। जो पुराने स्कूल हैं। जिनके पास खेल का मैदान नहीं है। उन्हें छोड़कर सभी स्कूलों में खेल को बढ़ावा देने के लिए पूरी कोशिश की जाती है।


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बदल रहीं है स्थितियां, पढ़ाई के साथ अब खेलकूद भी Rating: 4.5 Diposkan Oleh: amit gangwar

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