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Monday, October 23, 2017

कागजी ‘पोषण’ से संकट में बच्चों की सेहत, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा लाभ

 इलाहाबाद : नवजात से लेकर 18 साल तक के युवाओं को निरोग बनाने की केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी
योजना आरबीएसके (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) अधर में है। सारा काम फाइलों तक सीमित है। जमीनी कवायद नगण्य है। स्थिति यह है कि न बच्चों का परीक्षण हुआ, न कोई ब्योरा तैयार किया गया। जबकि प्रतिदिन इसका ऑनलाइन ब्योरा तैयार होना था। आश्चर्यजनक यह है कि बच्चों के इलाज को बनने वाला डिस्टिक अर्ली इंटरवेशन सेंटर को लेकर अभी कोई काम शुरू नहीं हुआ। 1संभागीय एवं स्वास्थ्य परिवार कल्याण केंद्र में छह माह पहले इलाहाबाद मंडल के 140 स्वास्थ्यकर्मियों को आरबीएसके के तहत प्रशिक्षित किया गया।

प्रशिक्षण प्राप्त चिकित्सक व नर्सो को गांव-गांव जाकर नवजात से लेकर 18 साल के युवाओं का स्वास्थ्य परीक्षण करना है। इसमें उन्हें उनके शारीरिक, मानसिक स्वास्थ्य का परीक्षण करना है। जैसे आंख की रोशनी, दांत, हृदय, सुनने, चलने, काम करने की क्षमता सहित हर ऐसे रोग की पड़ताल करनी है जो भविष्य में उनके जीवन को प्रभावित कर सकता है। इसके लिए उन्हें स्क्रिीनिंग किट भी मुहैया कराई गई है। बच्चों की रिपोर्ट निगेटिव हो या पॉजिटिव उसका ब्योरा ऑनलाइन करना है। जिन्हें इलाज की जरूरत है उन बच्चों को यूनिक आइडी देकर उनका इलाज डिस्टिक अर्ली इंटरवेशन सेंटर में कराना चाहिए, जो नहीं हो रही है।

एक टीम में चार सदस्य : आरबीएसके के तहत काम करने वाली एक टीम में चार सदस्य शामिल किए गए हैं। जिन्हें प्रतिदिन अलग-अलग क्षेत्रों का भ्रमण करके बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण करना है जो नहीं हो पा रहा है। वहीं सीएमओ डॉ. आलोक वर्मा का कहना है कि बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण व इलाज कराने का काम निरंतर चल रहा है। प्राथमिक विद्यालय व आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चे उससे लाभांवित हो रहे हैं।


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कागजी ‘पोषण’ से संकट में बच्चों की सेहत, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का जरूरतमंदों को नहीं मिल रहा लाभ Rating: 4.5 Diposkan Oleh: amit gangwar

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