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Sunday, October 22, 2017

अब मूल स्कूल बने शिक्षा मित्रों की पहली प्राथमिकता, मूल स्कूल पाने की मची होड़

अब मूल स्कूल बने शिक्षा मित्रों की पहली प्राथमिकता, मूल स्कूल पाने की मची होड़.

समायोजन रद होने से निराश शिक्षामित्र अब मूल स्कूलों में लौटने को बेताब हैं। 40 हजार वेतन पाने वाले अब 10 हजार में गुजारा करने की मजबूरी से टेंशन में हैं। दूर-दराज के स्कूलों में समायोजन के दौरान नियुक्ति पाने वाले शिक्षामित्रों को आवागमन का खर्च उठाना भारी पड़ रहा है। माना जा रहा है कि जल्द ही प्रदेश नेतृत्व इसकी पहल करते हुए सरकार पर दबाव बना सकता है।

आमदनी अठन्नी खर्चा रुपया..की कहावत शिक्षा मित्रों पर कुछ हद तक सटीक बैठ रही है। शिक्षामित्र से स्थाई शिक्षक का दर्जा मिलने के बाद शायद इन्होंने नही सोचा होगा की, फिर पुराने दिनों की ओर लौटना होगा। लंबी कानूनी लड़ाई में भले ही उन्हें सफलता न मिल सकी हो लेकिन अपने अस्तित्व की लड़ाई जारी रखने की जद्दोजहद ने शिक्षामित्रों को आंदोलन की तपिश ने आत्मविश्वास से भर दिया है। बदले हालात ओर परिस्थितियों में अब शिक्षा मित्र मूल स्कूलों में नियुक्ति पाने को बेताब है। इनका कहना है कि दूरदराज के स्कूलों में आने-जाने का खर्च ही इतना ज्यादा है कि 10 हजार के मानदेय में वह परिवार का भरण पोषण कैसे कर पाएंगे?

शिक्षामित्रों की तैनाती पर नजर समायोजन से पूर्व जिले के प्राथमिक विद्यालयों में करीब 2350 शिक्षामित्र कार्यरत थे। समायोजन की प्रक्रिया में 1800 स्थाई शिक्षक का दर्जा पाने में कामयाब हुए थे। विभागीय सूत्रों के मुताबिक 500 शिक्षामित्र उन्हीं स्कूलों में समायोजित हो गए थे जिनमें वे पूर्व से काम कर रहे थे। 1300 शिक्षामित्रों में 850 से ज्यादा ने समायोजन की प्रक्रिया में दूरदराज के स्कूलों में नियुक्ति पाने से परहेज नही किया था। हालांकि इससे स्कूलों तक पहुंचने का आवागमन का खर्च पहले के मुकाबले काफी बढ़ गया था।110 हजार के मानदेय से दुविधा

प्रदेश सरकार द्वारा समायोजन रद्द होने के बाद पुन: शिक्षामित्र बने, और समायोजन से वंचित रहे शिक्षा मित्रों आदि को एक समान 10 हजार मासिक मानदेय देने का निर्णय लिया है। अपने घर से 40-60 किमी का सफर तय कर स्कूलों में जाने वाले शिक्षा मित्र परेशान है, इनका कहना कि कम मानदेय में वह आवागमन का खर्च कैसे उठायेंगे? और इसीलिए उन्होंने मूल स्कूलों में भेजने की मांग की है।दस हजार के मानदेय में शिक्षा मित्रों को दूर-दराज के स्कूलों में आने-जाने में परेशानी हो रही है। प्रदेश नेतृत्व से भी इस बारे में सरकार पर दबाव बनवाने का काम किया जायेगा।

अंजू कश्यप, जिलाध्यक्ष आदर्श समायोजित शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन11मूल स्कूलों में भेजने संबंधी कोई भी निर्णय शासन स्तर पर ही लिया जा सकता है। यदि शासन से आदेश मिलेंगे तो उनका अनुपालन कराया जायेगा।रमेन्द्र कुमार सिंह, बीएसए


अब मूल स्कूल बने शिक्षा मित्रों की पहली प्राथमिकता, मूल स्कूल पाने की मची होड़ Rating: 4.5 Diposkan Oleh: amit gangwar

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