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Wednesday, November 29, 2017

‘अध्यापकों को पढ़ाने का तरीका आना भी जरूरी’, भाषा भी हो संयमित


शिक्षक को पढ़ाने की तकनीक और तरीके का ज्ञान होना जरूरी है। इसके साथ ही उनकी भाषा भी संयमित होनी चाहिए। यह बातें मंगलवार को मध्य प्रदेश के वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. एनके सिंह ने त्रिवेणीपुरम फेज-2 झूंसी स्थित माता कलावती कॉलेज ऑफ स्पेशल एजुकेशन में सतत् पुनर्वास शिक्षा कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर कहीं।खादी ग्रामोद्योग विकास समिति की ओर से संचालित माता कलावती कॉलेज ऑफ स्पेशल एजुकेशन में पांच दिवसीय सतत् पुनर्वास शिक्षा का शुभारंभ किया गया है।

डॉ. सिंह ने दीप प्रज्‍जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। संचालक प्रज्ञा ने डॉ. सिंह को स्मृति चिह्न दिया व दिव्यांग बच्चों ने फूल भेंट किया। कार्यक्रम के प्रथम दिन दिलीप दीक्षित, श्री कृष्ण पांडेय, श्वेता शिखा, अवनी, अक्षत, प्राची, पूनम, पीके, पूनम एवं विभिन्न राज्यों के प्रशिक्षुक, छात्र-छात्रएं व अन्य मौजूद रहे।वीर शहीहों का मंचन से नम हुईं आंखें: झूंसी। एनसीसी दिवस के अवसर पर मंगलवार को कैडेटों ने कोटवां स्थित तिलक इंटर कॉलेज में जलिया वाला बाग की पृष्ठ भूमि पर बने नाटक ‘खूनी बैसाखी’ के मंचन के साथ सेना की वीरता पर आधारित नाटक ‘वीर शहीद’ का भावपूर्ण मंचन किया गया। मंच पर शहीदों के बलिदान की कहानी देख लोगों की आंखें नम हो गईं। कैडेटों को सम्बोधित करते हुए एनओ लेफ्टिनेंट मनोज कुमार सिंह ने कहा कि एनसीसी के माध्यम से देश को सशक्त बना सकते हैं। कमलेश सिंह, रमेश चन्द्र शुक्ल, जावेद आदि थे।



‘अध्यापकों को पढ़ाने का तरीका आना भी जरूरी’, भाषा भी हो संयमित Rating: 4.5 Diposkan Oleh: amit gangwar

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