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यह सरकारी परिषदीय विद्यालय बना नजीर, कान्वेंट स्कूलों के बच्चों के नाम कटवाकर कराए जा रहे एडमीशन, ये है वजह


परिषदीय स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को लेकर लोगों का नजरिया अब बदलने लगा है। इटावा जिले में कुछ ऐसे परिषदीय स्कूल हैं जो अंग्रेजी माध्यम स्कूलों को टक्कर दे रहे हैं। कुछ बच्चे अंग्रेजी स्कूलों से नाम कटवाकर इसमें प्रवेश तक ले चुके हैं। इन्हीं में से एक परिषदीय स्कूल जसवंतनगर के निलोई गांव में है। यहां शिक्षकों ने स्कूल केकक्षों को पब्लिक स्कूलों की भांति सजा रखा है। बच्चों को भी आधुनिक संसाधनों से शिक्षा दी जा रही है। 

प्रधानाध्यापक जितेन्द्र सिंह यादव ने बताया कि उनके स्कूल में प्रोजेक्टर के जरिए कक्षा एक व दो में बिना किताब के पूरा अध्ययन कराया जा रहा है। स्कूल में छात्र/छात्राओं की कुल संख्या 175 है इनमें 25 ऐसे बच्चे हैं जो प्राइवेट स्कूलों को छोड़कर उनके स्कूल में  प्रवेश ले चुके हैं। इनमें शैफाली, आस्था, आकिल, आकिम, आबिद खान, शिवा, अल्तमस आदि शामिल हैं। प्रधानाध्यापक ने बताया कि स्कूल की शिक्षक अभिभावक समिति का भी पूरा सहयोग मिलता है।

लाइब्रेरी, डाइनिंग शेड के साथ वॉश बेसिन
प्रधानाध्यापक ने बताया कि प्रोजेक्टर से पढ़ाई के अलावा बच्चों के लिए खाने के लिए डाइनिंग शेड बना है जो सीमेंटेड है। जिस पर एक से लेकर सौ तक की गिनती ही नहीं बल्कि ए से लेकर जेड तक अंग्रेजी वर्णमाला भी लिखी हुई है और खाना खाने के दौरान बच्चे इन्हें पढ़ते रहते हैं। हाथ भी बच्चे वॉश बेसिन में धोते हैं। लर्निंग कॉर्नर और लाइब्रेरी भी है। विद्यालय में रनिंग वॉटर है। महत्वपूर्ण बात ये है कि यह सारा प्रबंध शिक्षकों ने अपने खर्चे से किया है।

कई पुरस्कार भी मिले
प्रधानाध्यापक जितेन्द्र सिंह यादव ने बताया कि स्वच्छता के लिए उन्हें 2016 में केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय से, इस वर्ष उप्र सरकार की ओर से उत्कर्ष विद्यालय का पुरस्कार मिल चुका है। 2016 में ही ललितपुर में आयोजित हुए राज्य स्तरीय पुरस्कार भी मिल चुका है। इस आयोजन में शिक्षकों को बुलाया गया था जिसमें उन्हें श्रेष्ठ शिक्षक का पुरस्कार भी मिला था।




यह सरकारी परिषदीय विद्यालय बना नजीर, कान्वेंट स्कूलों के बच्चों के नाम कटवाकर कराए जा रहे एडमीशन, ये है वजह Rating: 4.5 Diposkan Oleh: amit gangwar

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