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अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ेंगे मदरसों के छात्र: राज्य सरकार की इस पहल से नौकरी व उच्च शिक्षा में होगी आसानी


इलाहाबाद 1 मदरसों में दीनी तालीम से इतर राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की किताबें लागू होने से यहां के छात्र समान्य बोर्ड के छात्रों के साथ अब कंधे से कंधा मिलाकर चल सकेंगे। नई नीति के अनुसार मदरसों में गणित और विज्ञान सरीखे पाठ्यक्रमों को अनिवार्य रूप से पढ़ाया जाएगा। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अरबी-फारसी विभागाध्यक्ष डा. सालेहा रशीद कहती हैं कि प्रदेश सरकार का यह फैसला स्वागत योग्य है। मदरसों में वर्तमान में दर्स निजामी यानि सैकड़ों वर्ष पुराने और परंपरागत पाठ्यक्रम पढ़ाए जा रहे है। दशकों से इसके पाठ्यक्रम में की आवश्यकता महसूस हो रही है। कई मदरसों में आधुनिक शिक्षा शुरू भी की गई है। कंप्यूटर और अंग्रेजी सरीखे विषय शामिल भी कर लिए गए हैं,

लेकिन यहां से निकले छात्र अपने आप को अधूरा सा महसूस करते हैं। राज्य सरकार के इस फैसले से मदरसों में प्रतियोगी परीक्षा एवं आधुनिक शिक्षा के लिए बेहतरीन पहल माना जा सकता है। मदरसा संचालकों को इस को रचनात्मक पहल के रूप में लेना चाहिए। राज्य के तीन हजार से अधिक मान्यता एवं गैर मान्यता प्राप्त मदरसों में पढ़ रहे हजारों छात्रों को इस सकारात्मक परिवर्तन का फायदा होगा।प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए लाभप्रद होंगे पाठ्यक्रम 1एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम छात्रों के सर्वागीण विकास को ध्यान में रखकर किया गया है। ये पाठ्यक्रम प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए सर्वाधिक लाभप्रद होते हैं। छात्र सिविल सर्विसेज से लेकर राज्य लोकसेवा आयोग, एसएससी, रेलवे, बैंक सहित विभिन्न राजकीय सेवाओं में जाने की तैयारी प्रभावशाली ढंग से कर सकते हैं। 1डा. अहमद मकीन, सचिव, मदरसा वसीअतुल उलूम, बख्शीबाजार इलाहाबाद। 1’>>मदरसा बोर्ड ने पाठ्यक्रम में के लिए गठित कर चुकी है कमेटी1’>>अब अनिवार्य रूप से पढ़ाए जाएंगे गणित- विज्ञान सरीखे पाठ्यक्रम

अन्य क्षेत्रों में भी बढ़ेंगे मदरसों के छात्र: राज्य सरकार की इस पहल से नौकरी व उच्च शिक्षा में होगी आसानी Rating: 4.5 Diposkan Oleh: amit gangwar

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