10.10.17

अपनी ही नौकरी के दुश्मन बने शिक्षामित्र॥ सोशल मीडिया प्रभारी उ०प्र०प्रा०शि०मि०संघ उत्तर प्रदेश

अपनी ही नौकरी के दुश्मन बने शिक्षामित्र॥

बात सिर्फ वह करो जिससे नौकरी की राह खुले॥



शिक्षामित्रों के उज्ज्वल भविष्य के लिए आशा की एकमात्र किरण रिव्यू है, परन्तु जितनी राजनीति इस पर की जाने लगी है कि अब यह भी सफल होना मुश्किल लग रहा है।
शिक्षामित्रों को सर्वप्रथम अपने संगठन पर भरोसा रखना सीखना पड़ेगा कि संगठन जो भी कदम उठा रहा है वह समस्त शिक्षामित्रों के हित के लिए ही है।
       इसलिए संगठन के दिशा निर्देशों पर चलकर ही पुनः शिक्षक पद प्राप्त किया जा सकता है। अन्यथा गुमराह करने वालों की संख्या तो दिन ब दिन बढ़ती जा रही है।
        वर्तमान में कुछ गन्दे शिक्षामित्रों को अपनी नौकरी की चिन्ता कम और संगठन को चन्दा न मिले इसकी चिन्ता ज्यादा है। आम शिक्षामित्र जहाँ टेट की तैयारियों में व्यस्त है तो वहीं दूसरी तरफ ये गन्दे लोग कभी रिव्यू पर लेक्चर दे रहे हैं तो कभी श्री साल्वे जी के आफिस में फोन कर चन्दे का विवरण दे रहे हैं। अरे मूर्खों कम से कम इतना तो अकल होना ही चाहिए कि देश के साॅलिसिटर जनरल रह चुके शीर्षतम अधिवक्ता के पास बार बार फोन जाएगा और मीडिया तक में उनके नाम पर इतनी राजनीति शुरु हो जाएगी तो यदि वे सहमति दिये भी हैं तो भी इस मामले से किनारा कर सकते हैं। इन बेवकूफ शिक्षामित्रों की तो अपनी कोई छवि है नहीं, और इतने महान अधिवक्ता की छवि पर भी रोटी सेंकने का प्रयास कर रहे हैं। ये मूर्ख सीधे पेपर में छपवाते हैं कि श्री साल्वे जी से संगठन की कोई वार्ता ही नहीं हुई जबकि प्रदेश कोषाध्यक्ष श्री रमेश मिश्रा जी का श्री साल्वे जी के सामने हाथ जोड़कर केस लड़ने के लिए विनती करने  का सैकड़ों फोटो हमारी फोटो गैलरी में है। और सबसे हास्यास्पद तो ये है कि आदरणीय श्री साल्वे जी केस देखने के लिए सहमत हो चुकें हैं, तो दूसरी तरफ किसी निजी सचिव द्वारा केस न लिए जाने का फर्जी आडियो वायरल किया जा रहा है। महोदय केस निजी सचिव को नहीं, श्री साल्वे सर को लड़ना है।
       झूठ के पुलिन्दे झूठ से ही राजनीति करना जानते हैं। परन्तु जहाँ सब कुछ खत्म हो गया है, सिर्फ रिव्यू ही एकमात्र विकल्प बचा है, तो इस पर मजबूती से संगठन का साथ देने की बजाय संगठन का पैर खींचने में लोग ज्यादा व्यस्त हैं। अपने ही पदाधिकारियों की जमानत शाही जी नहीं करा पाए और गन्दी राजनीति का परिचय देते हुए पेपर में निकलवाते हैं कि चन्दे से विधान सभा चुनाव लड़ा जा रहा है। मा० शाही जी से मेरा हाथ जोड़कर निवेदन है कि कृपया भगवान के लिए एक लाख सत्तर हजार शिक्षामित्रों की रोजी रोटी के साथ गन्दी राजनीति करना बन्द कर दीजिए। आप भी एक प्रदेश अध्यक्ष हैं चन्दे से चुनाव लड़ने का प्रयास करके देख लीजिए, आपके ही  पदाधिकारी आपको लात मारकर बाहर न खदेड़ दें तो फिर कहिएगा। कुछ लोगों को संगठन के चार पहिया वाहन से चलने में ही दिक्कत होती है, साथियों आप लोग समझदार है, बताइये जिसको रात दिन सिर्फ चलना ही है, आज लखनऊ तो कल दिल्ली रहना है, तो परसों बनारस रहना है तो अगले दिन इलाहाबाद रहना है? वह दोपहिया से चले कि साइकिल से चले?
      सबको पता है कि रिव्यू की सुनवाई कैसे होती है, और वकील कब और कैसा किया जाता है। आपके बताने की जरुरत नहीं है। लेकिन आपको यह भी पता होना चाहिए सक्षम वकील की पैरवी से ही तारीखें बना और बिगड़ा करती हैं।
      आज लोग पूछ रहे हैं कि डेट कब तक लगेगा? और मैं दावा करता हूँ कि एक बार हमें लड़ने तो दीजिए, डेट भी लगेगा सुनवाई भी होगी, और और स्टे भी मिलेगा, चाहे वह सुप्रीम कोर्ट से मिले अथवा संविधान पीठ से। आप सबको यह पता होना चाहिए कि परम आदरणीय श्री साल्वे जी से संविधान पीठ तक लड़ने की सहमति प्राप्त की गयी है। लेकिन कुछ मक्कारों की वजह से यदि भविष्य में श्री साल्वे जी पीछे हट भी जाँय तो भी संगठन टाॅप टेन के वकील से ही रिव्यू पर लड़ेगा। लेकिन ये गन्दे लोग लड़ने तो दें पहले। परन्तु इन्हें शिक्षामित्रों के भविष्य से तो कोई मतलब है नहीं इन्हें तो हर वक्त अपने को जीवित रखने के लिए गन्दी राजनीति का ही सहारा लेना पड़ता है।
      मित्रों उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने हमेशा ही खुद को साबित किया है, वह सिर्फ शिक्षामित्र हित की लड़ाई लड़ता रहा है और लड़ रहा है। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक और हाई कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक हर जगह खुद को साबित किया है। भले ही सुप्रीम कोर्ट में राजनीतिक साजिश के कारण हम हार गये हों परन्तु संगठन हर सुनवाई और हर बहस पर टाॅप टेन के अधिवक्ताओं के साथ ही उतरा और लड़ा भी। उस समय ये डमरु बजाने वाले मदारी लोग कहाँ थे?
        अब और कितना इम्तिहान लेंगे आप लोग संगठन का? फिर भी मेरा दावा है कि संविधान पीठ के इस इम्तिहान में भी संगठन सफल होगा, बस सिर्फ एक बार आप लोग पैर खींचना बन्द कर  शिक्षामित्र हित के लिए, संगठन को लड़ने दीजिए।
       हमारे साथीगणों का एक प्रश्न बहुत आता है कि डेट कब लगेगी तो साथियों संगठन को इतना सहयोग कर दीजिए कि संगठन अधिवक्ताओं को हायर कर ले फिर डेट ही क्या स्टे भी आपको मिल जाएगा।
      आम शिक्षामित्र साथियों से मेरा करबद्ध निवेदन है कि सिर्फ उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के जिम्मेदार पदाधिकारियों पर ही भरोसा करें, बाकी यदि कोई नकारात्मक बातें लिख रहा है या फैला रहा है तो उसे अनसुना कर दें और दरकिनार कर दें। बात सिर्फ वह होनी चाहिए जिससे नौकरी मिलनी सुनिश्चित हो। वह बात कत्तयी नहीं होनी चाहिए जिससे आपकी लड़ाई कमजोर हो। धन्यवाद॥
    राजीव कुमार गुप्ता
   प्रदेश सब को आर्डिनेटर
     सोशल मीडिया
  उ०प्र०प्रा०शि०मि०संघ
      उत्तर प्रदेश

अपनी ही नौकरी के दुश्मन बने शिक्षामित्र॥ सोशल मीडिया प्रभारी उ०प्र०प्रा०शि०मि०संघ उत्तर प्रदेश Rating: 4.5 Diposkan Oleh: AMIT GANGWAR

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