Apr 16, 2018

राज प्रताप सिंह के अध्यक्ष बनने का मामला फंसा


वरिष्ठ आइएएस अधिकारी राज प्रताप सिंह के उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (यूपीईआरसी) के अध्यक्ष बनने का मामला फंस सकता है। सुप्रीम कोर्ट का गत गुरुवार का फैसला उनकी राह का रोड़ा बन सकता है। फैसला कहता है कि विद्युत नियामक आयोग में एक सदस्य कानून का जानकार होना चाहिए। अगर आयोग में कोई सदस्य कानून का जानकार नहीं है, तो भविष्य में ऐसे व्यक्ति को नियुक्त किया जाए। फैसले की ये पंक्तियां ही सिंह की राह में बाधा पैदा कर रही हैं। प्रदेश सरकार ने तो सिंह की नियुक्ति का आदेश जारी कर दिया था, लेकिन उन्होंने अभी तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। ऐसे में तकनीकी तौर पर उनकी नियुक्ति प्रभावी नहीं हुई है। यूपीईआरसी में किसी सदस्य के कानूनी जानकार नहीं होने की स्थिति में अब ऐसे व्यक्ति की ही नियुक्ति होनी चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने गत 12 अप्रैल को विद्युत नियामक आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति से संबंधित नियमों की व्याख्या करते हुए फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि कानून की धारा 84 (2) राज्य सरकार को अधिकृत करती है कि वह आयोग के अध्यक्ष पद पर हाई कोर्ट के जज को नियुक्त कर सकती है। परंतु यह नियम अनिवार्य नहीं है। लेकिन, आयोग में एक सदस्य का कानून का जानकार होना जरूरी है। ऐसा व्यक्ति जज हो या फिर उसके पास कानून का पेशेवर अनुभव हो। वह जिला या हाई कोर्ट जज बनने की काबिलियत रखता हो। यह आदेश फैसले की तारीख से प्रभावी होगा। इसका मतलब है कि फैसला आने से पूर्व जो नियुक्तियां हो चुकी हैं, उन पर असर नहीं होगा। लेकिन, अगर किसी राज्य आयोग में कानून का जानकार व्यक्ति सदस्य नहीं है, तो आगे से पद खाली होने पर कानून के ज्ञाता की ही नियुक्ति की जाएगी। यूपीईआरसी में एक अध्यक्ष और दो सदस्यों के पद हैं। सदस्य एसके अग्रवाल कार्यवाहक अध्यक्ष भी हैं। उनका कार्यकाल अभी बचा हुआ है। सरकार ने पिछले पखवाड़े राज प्रताप सिंह की अध्यक्ष पद पर और कौशल किशोर शर्मा की सदस्य पद पर नियुक्ति का आदेश जारी किया था। शर्मा एनटीपीसी के सेवानिवृत्त निदेशक (परिचालन) हैं। शर्मा ने कार्यभार संभाल लिया है। लेकिन, सिंह जो कि इस समय कृषि उत्पादन आयुक्त हैं, उन्होंने अभी तक पदभार नहीं ग्रहण किया था। सुप्रीम कोर्ट के वकील डीके गर्ग कहते हैं कि जब तक शपथ नहीं ली जाती तब तक नियुक्ति प्रभावी नहीं मानी जाती है। इस नियम के मुताबिक सिंह की नियुक्ति अभी तक प्रभावी नहीं हुई है। नियुक्ति को लेकर हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल हुई थी। कानूनी जानकार की नियुक्ति के नियम की व्याख्या मांगी गई थी। जब यह याचिका लंबित थी, तभी कोर्ट को बताया गया कि ऐसे ही मामले पर सुप्रीम कोर्ट बहस सुनकर फैसला सुरक्षित रख चुका है।’>>उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में नियुक्ति का मामला1’>>सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, आयोग में एक कानूनी जानकार होना जरूरी1

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