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May 20, 2018

छात्र नामांकन बढ़ाने को गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों की बंदी का सहारा, गैर मान्यताप्राप्त स्कूलों को बंद कराने की मुहिम परिषदीय विद्यालयों के लिए मुफीद


लखनऊ : अपनी जमीन खोते जा रहे परिषदीय विद्यालय छात्र संख्या बढ़ाने के लिए गैर मान्यताप्राप्त स्कूलों की बंदी से लगाए हुए हैं। बच्चों को मुफ्त में किताबें और यूनीफॉर्म के अलावा मिड-डे मील मुहैया कराने के बाद भी परिषदीय विद्यालयों की छात्र संख्या में पिछले कई सालों से लगातार गिरावट आ रही थी। शैक्षिक सत्र 2017-18 में ही यह गिरावट थमी थी। गिरावट ही नहीं थमी, छात्र संख्या में दो लाख का इजाफा भी हुआ था। यह बात और है कि बेसिक शिक्षा विभाग ने पिछले साल गैर मान्यताप्राप्त विद्यालयों को बंद कराने का अभियान चलाया था। यह अभियान छात्र नामांकन बढ़ाने के लिए मशक्कत करने में जुटे परिषदीय स्कूलों के लिए मुफीद साबित हुआ था। अभियान के तहत प्रदेश में संचालित किये जा रहे 3943 गैर मान्यताप्राप्त विद्यालय बंद कराये गए थे। जिन स्कूलों को बंद कराया गया, उनके बहुतेरे बच्चों ने पास के परिषदीय विद्यालयों में दाखिला लिया। इससे परिषदीय विद्यालयों के छात्र नामांकन में लगातार आ रही गिरावट पर ब्रेक लगा था। 1 चालू शैक्षिक सत्र में भी बेसिक शिक्षा विभाग ने गैर मान्यताप्राप्त स्कूलों के खिलाफ अभियान चलाया है। कुशीनगर हादसे के बाद इसमें और तेजी आयी है। अभियान के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों में अब तक 951 गैर मान्यताप्राप्त स्कूलों को बंद कराया जा चुका है। बीते अप्रैल में चलाये गए स्कूल चलो अभियान के बावजूद परिषदीय स्कूलों में पिछले सत्र की तुलना में चालू सत्र में सात लाख बच्चे कम हुए थे। लेकिन गैर मान्यताप्राप्त स्कूलों को बंद कराने का अभियान परिषदीय स्कूलों की छात्र संख्या बढ़ाने के मामले में असरदार साबित होने लगा है। बीती आठ मई को परिषदीय स्कूलों का छात्र नामांकन 1,47,03,332 था जो 18 मई को बढ़कर 1,47,65,176 हो गया था। यानी दस दिनों में छात्रों की संख्या 61,844 बढ़ गई। बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों को उम्मीद है कि गर्मी की छुट्टियों के बाद परिषदीय विद्यालय जब जुलाई में फिर खुलेंगे तो छात्र संख्या में और इजाफा होगा।


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