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Aug 1, 2018

दो साल तक मनाई जाएगी गांधीजी की 150वीं जयंती: विद्यालयों, संस्थाओं और सरकार के स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमों का किया जाएगा आयोजन


लखनऊ : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती प्रदेश में भव्य उत्सव के रूप में दो साल तक मनाई जाएगी। इस दौरान विद्यालयों, संस्थाओं और सरकार के स्तर पर विभिन्न कार्यक्रमों का किया जाएगा। गांधीजी को श्रद्धांजलि देने के लिए विधानमंडल का संयुक्त अधिवेशन भी बुलाया जा सकता है। ों को मूर्त रूप देने के लिए कार्यकारी समिति का गठन भी किया गया है।
महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाने के लिए राज्य स्तरीय समिति की बैठक मंगलवार को शास्त्री भवन में हुई, जिसकी अध्यक्षता राज्यपाल राम नाईक ने की। इसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, डॉ. दिनेश शर्मा समेत मंत्रि परिषद के सभी सदस्य व विपक्षी दलों में कांग्रेस के सांसद प्रमोद तिवारी व रालोद के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मसूद अहमद भी शामिल थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के प्रतिनिधि के रूप में जस्टिस विक्रम नाथ भी पहुंचे। उन्होंने सुझाव दिया कि संयुक्त अधिवेशन में गांधीजी को श्रद्धांजलि देने के साथ ही आजादी के बाद से अब तक के कार्यो का सिंहावलोकन किया जाए। राज्यपाल ने इस अवसर पर कुष्ठ रोगियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास दिए जाने का भी सुझाव दिया। विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि विश्वविद्यालयों में गोष्ठियों का किए जाने के साथ गांधीजी की पुस्तकों में भारतीय संस्कृति, धर्म, दर्शन पर व्यक्त विचारों का सूचना विभाग से प्रकाशन कराया जाए।1शास्त्री भवन में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती की तैयारी के लिए आयोजित बैठक में जाते राज्यपाल राम नाईक साथ में उपस्थित मुख्यमंत्री साथ में उपमुख्यमंत्री डॉ.दिनेश शर्मा16 साल बाद पंचम तल राज्यपाल
प्रदेश में सोलह साल बाद यह पहला अवसर था जब किसी मुख्यमंत्री के कार्यालय में राज्यपाल पहुंचे हों। सोलह साल पहले राष्ट्रपति शासन में तत्कालीन राज्यपाल विष्णुकांत शास्त्री ने इस कार्यालय में बैठकें की थीं। राज्यपाल राम नाईक ने मुख्यमंत्री की मौजूदगी में उनके कार्यालय जाने की परंपरा को शुरू किया। एक सवाल पर राज्यपाल ने इसे सामान्य बात बताया। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कभी मुङो बुलाया नहीं। 1नहीं पहुंचे मुलायम, मायावती और अखिलेश यादव1 समिति की बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री के नाते मुलायम सिंह यादव, मायावती और अखिलेश यादव को भी बुलाया गया था। मुलायम सिंह ने पत्र भेजा कि वह संसद चलने की वजह से आने में असमर्थ हैं।

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