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प्रदेश में शिक्षा का मूल अधिकार कड़ाई से लागू है?


इलाहाबाद : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि सीनियर बेसिक स्कूल की सोसायटी और प्रबंध समिति के बीच प्रधानाचार्य की नियुक्ति को लेकर चल रहा विवाद बच्चों के शिक्षा पाने के मूल अधिकार को विफल करने वाला है। बच्चे देश का भविष्य हैं और प्रबंध समिति का प्रयास देशहित के खिलाफ है, क्योंकि विवाद के चलते शैक्षणिक माहौल खराब हो रहा है और छह से 14 साल तक के बच्चों को शिक्षा नहीं मिल पा रही है। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा लखनऊ से 16 अगस्त तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर बताने को कहा है कि क्या प्रदेश में प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूल में अनिवार्य शिक्षा कानून और अनुच्छेद 21 ए के तहत शिक्षा के मूल अधिकार को कड़ाई से लागू किया गया है? यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केशरवानी ने इमलिया जूनियर हाईस्कूल सोसायटी जालौन (उरई) के अध्यक्ष की याचिका पर दिया है। याचिका में बीएसए के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसके तहत प्रबंध समिति की ओर से नियुक्त प्रधानाचार्य का अनुमोदन कर दिया गया है।

प्रदेश में शिक्षा का मूल अधिकार कड़ाई से लागू है? Rating: 4.5 Diposkan Oleh: AMIT GANGWAR

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