Sep 22, 2018

कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट अपडेट: शिवपूजन सिंह ने सभी शिक्षामित्रों से अपील

*_🚩कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट  अपडेट_*
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*_🚩मेरे द्वारा दाखिल  कंटेम्प्ट ऑफ़ कोर्ट की रिट 3112  की सुनवाई 06 सितम्बर 2018 को नहीं हो सकी।क्योंकि 6th Sept को माननीय कोर्ट में फ्रेस की संख्या अत्यधिक (104 केस ) थी। जिनको सुनते- सुनते 3:15 हो गया फिर पर्शन अपीयरिंग में काफी  समय लगा । अपना केस टेकअप नहीं हुआ । सरकार का जवाब और पक्ष सुना नहीं जा सका ।पिछले ऑर्डर को देखते हुए अपना पक्ष मजबूत हुआ है।_*
*_8 अगस्त 2018 को कंटेम्प्ट रिट के आदेश में माननीय कोर्ट ने साफ -साफ लॉस्ट पैराग्राफ में लिखा है_*
*_" In case show cause is not filed by the next date fixed.The opposite party shall appear in person before this Court. "_*
*_Order Date: 08.08.2018_*
*_⏏इस नोटिस को सरकार ने बड़ी  गम्भीरता से किया है और प्रमुख सचिव बेसिक श्रीमती मनीषा त्रिघटिया जी ने माननीय कोर्ट से माफ़ी मांगते हुए हमारे पूर्वानुमान के अनुसार ही रटा रटाया जवाब तैयार कराया है। अगली डेट में उनकी कोशिश होगी जवाब दाखिल करने की परन्तु इससे पहले हमें पूरी तैयारी से उपरोक्त जवाब को चैलेंज करना है।हम उन्हें कोई मौका नहीं देना चाहते ,पर आर्थिक रूप से बेहद कम सहयोग की वजह से हम कमजोर पड़ रहे। आप सबसे विनम्र निवेदन है! सभी शिक्षामित्र साथी कम से कम सौ रुपये का आंशिक सहयोग अवश्य करें।संघर्ष न्याय संगत और जीत की ओर अग्रसर है!आगे जीत निश्चित है !कृपया सहयोग करें ।ये संघर्ष सच्चाई का है।सभी शिक्षामित्र के सम्मान का है।कृपया सहयोग करें✍🏼शिवपूजन सिंह 9415262829🚩_*

*_🚩फ़रवरी 2018 को माननीय उच्च न्यायालय में शिवपूजन सिंह द्वारा याचिका संख्या 6464/2018 दाखिल की गयी। माननीय न्यायाधीश महोदय  महेशचन्द्र त्रिपाठी जी ने 22 फरवरी 2018 को शिक्षामित्रों को पैराटीचर के रूप में केन्द्र सरकार द्वारा प्रदत्त 38,878/- रूपये प्रति माह पूर्ण वर्ष दो माह के भीतर देने का निर्देश दिया। परन्तु राज्य सरकार द्वारा माननीय उच्च न्यायालय द्वारा इलाहाबाद के आदेश/ निर्देश का ससमय अनुपालन नहीं किया गया। माननीय उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन न करने पर माननीय न्यायालय में (अवमानना) कॉन्टेम्प ऑफ़ कोर्ट  याचिका संख्या 3112/2018, 29 मई को दाखिल हुई। जिसमें काफी अच्छा परिणाम मिल रहा और इसी रिट में दाखिल सरकार के जवाब को चैलेन्ज करना हैं।जिसमें आप सबके सहयोग की नितांत आवश्यकता है।_*
*_🙏मेरी प्रेयर और उससे सम्बंधित माननीय कोर्ट का ऑर्डर कृपया ध्यान से पढ़ें।🔽_*
*✍ Case :- WRIT - A No. - 6464 of 2018*
*Petitioner :- Shivpujan Singh And  Others*
*✍ Shivpujan Singh and  Others are before this*
*Court with request to issue direction to the
respondents to consider their claim for payment of
*_Rs.38,000/- as_* monthly honorarium treating them as
*Para Teachers* as they have completed their BTC Course and in this regard, the budget was also allocated by the Government of India in its meeting dated 15.5.2017.
*_✍ Learned Additional Chief Standing Counsel has no objection to the said prayer._*
*_हम PAB द्वारा निर्धारित कैटेगरी वाइज प्राप्त प्रशिक्षित वेतन की मांग कर रहे !और काउंटर में सभी को दस हजार देने का जवाब दिया जा रहा। माननीय सुप्रीम कोर्ट से सहायक अध्यापक की नियुक्ति वाला समायोजन रद्द हुआ है। जोकि सरकार ने गलत ढंग से किया। हमारा सेवारत प्रशिक्षण हुआ है और हम आज भी पूर्वत विद्यालय में शिक्षण कार्य कर रहे।सेवारत प्रशिक्षण की नियमावली हम पर भी लागू होनी चाहिए।हमें नियमित करना था। पर सबको एक ही नियमावली में लपेटकर सबका सर्वनाश लिखा दिया गया ...._*
*_माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 26 जुलाई, 2017 को उ0प्र0 सरकार द्वारा प्राथमिक विद्यालय में शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक के पद पर एक लाख सैंतीस हजार शिक्षा मित्रों का समायोजन रद्द कर दिया। माननीय न्यायालय के आदेश के अनुपालन की आड़ में 1 अगस्त, 2017 से प्रदेश सरकार द्वारा सूबे के समस्त  शिक्षामित्रों को मात्र दस हजार रूपये 11 माह संविदा कर्मी के रूप में दिया जा रहा है, जो कि न्यायोचित नहीं है।_*
*_राइट टू एजूकेशन एक्ट  लागू होने के बाद एम0एच0आर0डी0 एवं एन0सी0ई0टी0 से यानि केन्द्र सरकार ने स्नातक योग्यताधारी शिक्षामित्रों को जिनकी प्रदेश में संख्या एक लाख चौबीस हजार थी को ही (डी बी0टी0सी0) प्रशिक्षण की अनुमति प्रदान किया। परन्तु प्रदेश सरकार द्वारा प्रशिक्षण की संख्या एवं अनुमति में त्रुटि की प्रशिक्षित स्नातक शिक्षामित्रों को केन्द्र सरकार की अनुमति के अनुसार नियमित (स्थाई) करना था। परन्तु राज्य सरकार ने एक लाख सैंतीस हजार शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक के रूप मं नियुक्ति करते हुए समायोजन का नाम दिया। जो कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निरस्त कर दिया गया। राज्य सरकार ने शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक के रूप में नियुक्त करके केन्द्र सरकार के अनुमति के अनुसार ही गलत सूचना प्रेषित की। केन्द्र सरकार को समायोजित शिक्षामित्रों की संख्या 121063 की संख्या को पैराटीचर अपग्रेडेड एज टीचर बताया और प्रदेश में 137000 सहायक अध्यापक की नियुक्ति कर दिया।_*
*_केन्द्र सरकार ने 15 मई 2017 के स्नातक पूर्ण प्रशिक्षित इन्हीं शिक्षामित्रों यानी पैराटीचर अपग्रेडेड एज टीचर 121063 संख्या को ही 38878/- रूपये प्रतिमाह वेतन पूर्ण वर्ष देने का बजट राज्य को प्रदान किया। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद NCET नई दिल्ली ने वर्ष 2011 से उ0प्र0 में कार्यरत प्रशिक्षित पैरा टीचरों का वेतन नियमित शिक्षकों की तरह दिये जाने की संस्तुति की है और NCET द्वारा 14 जनवरी 2011 को पत्र संख्या 3953/79- 5/2011 के द्वारा 1.24 लाख स्नातक उत्तीर्ण शिक्षा मित्रों को डीबीटीसी का प्रशिक्षण प्रदान करने की अनुमति राज्य सरकार को प्रदान किया। जिसकी वैधता मा0 उच्च न्यायालय एवं मा0 सर्वोच्च न्यायालय द्वारा प्रमाणित हो चुकी है। उ0प्र0 के 121063 शिक्षामित्र/ पैराटीचर इस श्रेणी में आते हैं, जिनका भारत सरकार द्वारा 38,878/- रूपये प्रतिमाह 12 माह का शिक्षण सत्र 2017-18 के लिए निर्गत हुआ है, जिसकी पुष्टि PAB की रिपोर्ट से हो चुका है। परन्तु राज्य सरकार द्वारा समस्त शिक्षामित्रों को एक ही श्रेणी में सम्मिलित करते हुए 10 हजार रूपये प्रतिमाह दिया जा रहा है। जबकि अप्रशिक्षित शिक्षामित्र जिनकी संख्या 26563 थी को ही 10 हजार 11 महीने मानदेय देने की संस्तुति दी थी_*
*_शिक्षामित्र नेताओं द्वारा वोट बैंक की राजनीति ,संख्याबल के घमण्ड में नियम कानून को ताक पर रख दिया गया।आज समायोजित व् असमायोजित सब इनकी अदूरदर्शिता की सजा भोग रहे । करीब 800+ शिक्षामित्र साथी दुनिया से विदा हो गए। और हम आपस में लड़ रहे। नेताद्वय तो कभी समझेगें नहीं क्योकि उनमें गलती स्वीकार करने की हिम्मत नहीं है।और सही व्यक्ति को आगे बढ़ने में कभी सहयोग भी नहीं करेगे । सही दिशा में सही बात को लेकर संघर्ष न करेगे न ही करने देगें। पर जो भी सही दिशा में संघर्ष कर रहा उसकी आलोचना जरूर करेगें।हर सम्भव कोशिश करेगें उसकी जड़ खोदने की। अगर मेरी बात से किसी को संसय हो तो कृपया एक बार माननीय हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट का ऑर्डर आप ढंग से पढ़ लें और तब इनसे सिर्फ इतना पूँछ लें की किसी भी पॉइंट पर कोई जवाब है?नहीं होगा क्योकि हम सरकार के विरोध में कभी गए नहीं । माननीय हाई कोर्ट से सरकार हारी हम प्रभावित हुए पर सरकार की गलतियों की सजा पर हम मौन रहे।फिर माननीय सुप्रीम कोर्ट से भी सरकार हार गयी हम मौन रहे। हम विरोधी से लड़ने की रिट किये जबकि हमारा सर्वनाश सरकार और सरकार के उच्चाधिकारियों ने गलत तथ्य गलत नियमावली बनाकर किया।रिट सरकार के विरुद्ध होनी चाहिए थी।सब कुछ जानते हुए भी नेतागण चुप रहे क्योकि अगर बोलते तो शिक्षामित्र के साथ न्याय हो जाता। इनके चहेते अधिकारी नप जाते।शिक्षामित्र श्रेणीगत होकर स्थायी हो जाता। और बहुत से नेता जो अनर्गल ढंग से लाभ की सूची में शामिल थे बाहर हो जाते। शिक्षामित्र का बेसिक ,एस एस ए में बटवारा हो जाता ।सबको स्थायी करते हुए शिक्षक के समान सुविधायें मिलने लगती। शिक्षामित्र सन्तुष्ट हो जाता तो लगभग सबकी नेता गिरी खत्म हो जाती। आजीवन नेता बने रहने का सपना तब कैसे पूरा होता??क्षमा करें सच यही है। आप सब अपनी क्षमता भूल गये मर्यादा भूल गए ।_*
*_♦अभी भी 70 फीसदी शिक्षामित्र आँख कान बन्द करके भक्तों की भांति अगले आदेश की प्रतीक्षा में रहता है। कब आदेश हो हम फूल पत्ती लेकर सेवा में हाजिर हों!!_*
*_अभी भी वक्त है कृपया सम्भल जायें।_*
*_जो भी होगा अब सही दिशा में विधिक रूप से सही होगा वो माननीय न्यायालय हो या सरकार।_*
*_सरकार के उच्चाधिकारियों ने सरकार को भी शिक्षामित् समस्या समाधान को लेकर दिग्भ्र्मित कर चुके हैं। जितने भी छोटे बड़े अगुवा हैं उनको ये बात समझनी होगी । नियमतः सही बात जो शिक्षामित्रों के साथ धोखा किया गया उसको अगर उजागर करेगें । तभी हम सब का कल्याण हो सकता है।_*
*_✍पहली भर्ती में लगभग 7 हजार दूसरी में 14 हजार शिक्षामित्र अगर भर्ती होकर सहायक अध्यापक बन भी गए तो 1 लाख 26 हजार शिक्षामित्रों बचेगें। इतनी बड़ी संख्या को समय से समाधान सरकार को करना ही होगा।नियमतः 1.24  लाख शिक्षा मित्रों पर कोई परीक्षा भर्ती लागू नहीं होती। और शेष को विभागीय टीईटी करना सरकार का दायित्व है । शिक्षामित्र  बीटीसी ,बीएड वालों की तरह आसमान से नहीं टपके।शिक्षामित्र 17 वर्षों से अनवरत शिक्षण कार्य कर रहा। हमें न्याय अवश्य मिलेगा_* *_🚩 विनम्र निवेदन है आप हमें अपना पूर्ण सहयोग दें।✍🏼शिवपूजन सिंह 9415162829.🚩_*

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