Sep 4, 2018

स्कूलों में स्वच्छता सुविधाएं मुहैया कराने में आई तेजी, भारत में बिना शौचालय वाले स्कूलों की संख्या तेजी से घटी: यूएन


बीते कुछ सालों में भारत ने स्कूलों में स्वच्छता सुविधाएं पहुंचाने में तेज विकास किया है। देश में ऐसे स्कूलों की संख्या में कमी आई है, जहां स्वच्छता सुविधाएं नहीं हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ के संयुक्त निगरानी कार्यक्रम (जेएमपी) की साझा ‘डिंकिंग वाटर, सेनिटेशन, हाइजीन इन स्कूल: 2018 ग्लोबल बेसलाइन’ में यह जानकारी दी गई है। 1यूएन एजेंसी की इस के अनुसार स्वच्छता से स्कूलों में पढ़ाई का अच्छा माहौल बनता है। शौचालयों की उचित व्यवस्था होने से लड़कियां भी स्कूल जाने से नहीं ङिाझकतीं। भारत में 2000 से 2016 के बीच बिना शौचालयों वाले स्कूलों की संख्या में ज्यादा गिरावट आई है। इससे स्पष्ट है कि 2016 तक भारत के प्रत्येक स्कूल में किसी ना किसी प्रकार की स्वच्छता सुविधा उपलब्ध थी। जबकि एक दशक पहले भारत के आधे स्कूलों में शौचालय तक नहीं था। 1 में कहा गया है कि मासिक धर्म (पीरियड्स) से जुड़े स्वच्छता प्रबंधन में भारत को अभी बहुत कुछ करना है। चंडीगढ़ में जहां 96 फीसद स्कूलों में ढक्कन वाले कूड़ेदान मौजूद हैं।1वहीं छत्तीसगढ़ में ऐसे स्कूलों की संख्या सिर्फ 36 फीसद है। मिजोरम एक मात्र ऐसा राज्य है जहां के 50 फीसद स्कूलों में सेनेटरी पैड नष्ट करने की मशीन है। 1 के मुताबिक, दुनियाभर के 30 फीसद स्कूलों में पीने का साफ पानी मौजूद नहीं है। करीब एक-तिहाई स्कूलों में शौचालय तक नहीं है। 90 करोड़ बच्चे ऐसे स्कूल में जाते हैं जहां हाथ धोने के लिए साबुन और पानी की व्यवस्था नहीं है। यूनिसेफ के केली एन नायलर ने कहा, स्कूलों में स्वच्छता को नजरअंदाज करना बच्चों के स्वास्थ्य के लिए घातक है।

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