Sep 8, 2018

Dyslexia: सामान्य बच्चों की तरह सीख सकते हैं डिस्लेक्सिया ग्रसित बच्चे, ये हैं डिस्लेक्सिया के कारण व लक्षण


इलाहाबाद : डिस्लेक्सिया बच्चों में पढ़ने, समझने व बोलने में परेशानी से संबंधित बीमारी है। इस बीमारी में बच्चे को सीखने में दिक्कतें आती है, पर यह लाइलाज नहीं है। यदि तरीका सही हो तो डिस्लेक्सिया से ग्रसित बच्चे भी सामान्य रूप से सीख सकते हैं। 1यह बातें इलाहाबाद विश्वविद्यालय के सेंटर ऑफ बिहैवियरल एंड काग्निटिव साइंसेज (सीबीसीएस) में आयोजित डिस्लेक्सिया असेसमेंट फॉर लैंग्वेजेज ऑफ इंडिया विषयक वर्कशॉप में आर्किड्स फाउंडेशन की अध्यक्ष डॉ. गीत आबेरॉय ने कहीं। इस वर्कशॉप में शिक्षक, मनोवैज्ञानिक, स्पेशल एजुकेशन से जुड़े व्यक्तियों ने प्रतिभाग किया। वर्कशॉप का उद्देश्य डिस्लेक्सिया की शुरुआती स्तर पर पहचान करना व इससे कैसे छुटकारा मिले इस पर विचार करना था। डॉ. गीत ओबेरॉय ने कहा कि भारत में लगभग 10 से 15 प्रतिशत स्कूली बच्चे किसी न किसी प्रकार के डिस्लेक्सिया से ग्रस्त हैं। इसके पीछे प्रमुख कारण हमारी शिक्षा व्यवस्था का बहुभाषी होना है। बच्चे की मातृभाषा हंिदूी है और वो पढ़ता अंग्रेजी है। यह स्थिति लड़कों और लड़कियों को समान रूप से प्रभावित कर सकती हैं। यदि दूसरी कक्षा तक ऐसे बच्चों की पहचान नहीं हो पाई तो ऐसे बच्चे बड़े होकर भी इस समस्या से परेशान रह सकते हैं। सीबीसीएस के पूर्व विभागाध्यक्ष व बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. जनक पांडेय ने कहा कि इस तरह के सेमिनार से सामान्य जन को फायदा पहुंचता है। विभागाध्यक्ष प्रो. भूमिका आर. कर ने कहा कि सीबीसीएस भविष्य में इस प्रकार के बच्चों को निश्शुल्क परामर्श सेवाएं देने जा रहा है।
डिस्लेक्सिया के कारण : डिस्लेक्सिक बच्चों का मस्तिष्क सामान्य मस्तिष्क से भिन्न होता है। ऐसे बच्चों में मानसिक विकास के लिए जिम्मेदार नर्वस सिस्टम बचपन से ही अलग प्रकार का होता है। यह भिन्न वाइरिंग ही डिस्लेक्सिया का कारण बनती है।
ये हैं लक्षण : एनबीआरसी मानेसर की प्रोफेसर नंदिनी सी सिंह ने बताया कि बच्चों में डिस्लेक्सिया के कुछ आम लक्षण हैं। बोलने में कठिनाई, हाथों और आंख में तालमेल न होना, ध्यान न दे पाना, कमजोर स्मरण शक्ति और समाज में फिट होने में कठिनाई।

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