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03 October 2018

68500 शिक्षक भर्ती में हुए जिला आवंटन में गड़बड़ियों की जांच की तैयारी


इलाहाबाद : परिषदीय स्कूलों की 68500 सहायक अध्यापक भर्ती में चयनित भी अब जिला आवंटन को लेकर चयन प्रक्रिया पर निशाना साध रहे हैं। उनका कहना है कि जिला आवंटन में लिखित परीक्षा के अंकों को दरकिनार कर दिया गया है। कम अंक पाने वाले अपने गृह जिले में तैनाती पाने में सफल रहे हैं, वहीं अधिक अंक हासिल करने वालों को दूसरे जिलों में जाना पड़ा है। इस गड़बड़ी की भी जांच कराने की तैयारी है।1शिक्षक भर्ती का परीक्षा परिणाम प्रकरण अभी ठंडा नहीं पड़ा है, इसी बीच चयन मानक बदलने व जिला आवंटन गड़बड़ाने का मुद्दा भी तूल पकड़ रहा है। सुदूर जिलों में भेजे गए कई चयनित इस मामले को कोर्ट में भी चुनौती दे चुके हैं लेकिन, कोर्ट ने जिस तरह से कुछ अभ्यर्थियों को काउंसिलिंग में शामिल कराने में राहत नहीं दी, उसे देखकर दूर जिलों में तैनात अभ्यर्थी अब शासन पर दबाव बना रहे हैं कि इस गड़बड़ी की जांच कराकर दोषियों को दंडित किया जाए और जिला आवंटन नए सिरे से किया जाए। बेसिक शिक्षा के अफसर इस मामले में खुलकर बोल नहीं रहे हैं, वह दबी जुबान कहते हैं कि जिला आवंटन में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है, दो चयन सूची बनने से ऐसी नौबत आई है। यदि पहले ही तय पदों पर चयन होता तो तस्वीर होती लेकिन दूसरी चयन सूची में पद बढ़े तो कम अंक वालों को गृह जिले में ही जगह मिल गई।

अभ्यर्थी इससे भी सहमत नहीं है। उनका कहना है कि जब शासनादेश में 68500 पदों की भर्ती हो रही थी तो चयन मानक कम क्यों किया गया, जिससे दूसरी सूची जारी करना पड़ा। इसमें उनका दोष नहीं है, बल्कि जिन अफसरों ने इसे किया है, उनकी जवाबदेही तय की जाए। यह प्रकरण राजधानी में भी गूंजा है। वरिष्ठ अफसरों ने कहा है कि इस मामले को गंभीरता से देखा जाएगा।
विकास में पिछड़े जिलों में सीटें खाली
शिक्षक भर्ती में विकास में पिछड़े आठ जिलों में सबसे अधिक पदों का आवंटन किया गया था लेकिन, अभ्यर्थी तय पदों के सापेक्ष भेजे नहीं जा सके। इसीलिए उन जिलों में करीब चार हजार से अधिक सीटें अब भी खाली हैं। कहा जा रहा है कि दूसरी चयन सूची में इन जिलों में सबसे कम आवंटन हुआ है।

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