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29 November 2018

परिषदीय प्राथमिक-उच्च प्राथमिक विद्यालयों के विलय का आदेश जारी, एक ही परिसर में संचालित कक्षा एक से पांच तक व कक्षा छह से आठ तक के विद्यालय एक में होंगे विलय: यह होंगे विलय के नियम


सूबे में एक ही परिसर में चलने वाले प्राइमरी व जूनियर स्कूलों के संविलयन को लेकर बुधवार को शासनादेश जारी कर दिया गया। निदेशक बेसिक शिक्षा डा. सव्रेन्द्र विक्रम बहादुर सिंह ने सभी मण्डलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) व सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को सम्बोधित शासनादेश में नियमानुसार कार्रवाई पूर्ण करते हुए इसे कड़ाई से लागू करने को कहा है। इसके तहत दस विन्दुओं को लेकर निर्देश जारी किये गये हैं। इसके मुताबिक एक ही परिसर में संचालित बेसिक शिक्षा परिषद के कक्षा एक से आठ तक के स्कूलों का संविलयन कर एक साथ संचालन होगा। अभी तक कक्षा एक से पांच तक अलग व कक्षा छह से 8 तक के विद्यालय अलग-अलग संचालित हो रहे थे। संविलियन के बाद विद्यालयों में कार्यरत प्रभारी प्रधानाध्यापकों व प्रधानाध्यापको में जो वरिष्ठतम प्रधानाध्यापक होगा, वह ही विद्यालय का वित्तीय व प्रशासनिक नियंतण्ररखेगा। प्रधानाध्यापक का दायित्व भी उसी पर होगा। इसके बाद अब कक्षा एक से आठ तक के लिए आरटीई के मानकों के मुताबिक शिक्षकों की तैनाती होगी। इसका मानक 30 सितम्बर 2018 की छात्र संख्या के आधार पर होगा। संविलयन के बाद विद्यालयों का अलग-अलग यू डायस कोड नहीं रहेगा, बल्कि संविलयन की कार्रवाई के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को नये सिरे से यू डायस कोड का निर्धारण करना होगा। संविलयन के बाद विद्यालयों में पदों की गणना संविलयन होने वाले विद्यालयों के पदों के आधार पर की जाएगी। इसके लिए सचिव बेसिक शिक्षा परिषद के स्तर से अलग से आदेश जारी किये जाएंगे। विद्यालय में सभी अभिलेखों की अभिरक्षा का दायित्व प्रधानाध्यापक का होगा। इसके लिए दोनों विद्यालयों में मिलाकर प्रधानाध्यापक का एक ही कक्ष होगा। दोनों विद्यालयों की अलग-अलग प्रबंध समिति की जगह नये सिरे से प्रबंध समिति का पुनर्गठन होगा और वरिष्ठतम प्रभारी प्रधानाध्यापक या प्रधानाध्यापक सदस्य सचिव होंगे। इसके साथ ही संविलियन किये गये विद्यालयों में पूर्व से सृजित अध्यापक/ प्रधानाध्यापक के पद यथावत बने रहेंगे। शासनादेश में कहा गया है कि शासन के 22 नवम्बर को दिये गये निर्देशों के परिपेक्ष्य में संविलयन की कार्रवाई पूरी करनी होगी। हालांकि शासनादेश में अभी इसके लिए कोई अंतिम तिथि तय नहीं की गयी है।

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