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15 November 2018

स्कूलों को देना होगा मिड-डे मील का ऑनलाइन समस्त ब्यौरा


स्कूलों को देना होगा मिड-डे मील का ऑनलाइन ब्यौरा
सरकारी स्कूलों में छात्रों को दिए जाने वाले मिड डे मील (मध्याह्न भोजन) की गुणवत्ता संबंधी शिकायतों से परेशान सरकार व्यवस्था को और चुस्त-दुरुस्त एवं पारदर्शी बनाने में जुट गई है। अब छात्रों को हर दिन परोसे जाने वाले खाने का ऑनलाइन ब्योरा देना होगा। इसके लिए सरकार एक नई प्रणाली तैयार कर रही है और इस पर जल्द ही अमल भी होगा। इससे व्यवस्था में पारदर्शिता तो आएगी ही, जांच में भी सुविधा मिलेगी।

सरकार की यह कवायद बेहद अहम है। अभी स्कूली छात्रों को दिए जाने वाले मिड डे मील का मेन्यू तो तय है, लेकिन इसकी निगरानी की कोई व्यवस्था नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक, इस योजना की हाईटेक निगरानी की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसके तहत छात्रों को परोसे जाने वाले हर दिन के खाने के बारे में जानकारी ली जाएगी।

मौजूदा व्यवस्था के तहत स्कूलों की ओर से अभी छात्रों की उपस्थिति का ही ब्योरा भेजा जाता है। पहले यह व्यवस्था त्रैमासिक थी, जिसे गड़बड़ियों की शिकायतों के बाद मासिक कर दिया गया।

मिड डे मील की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सरकार पहले भी कई अहम कदम उठा चुकी है। इस क्रम में अभिभावकों की एक कमेटी भी गठित की गई थी, जो कारगर नहीं हो पाई।

गौरतलब है कि मिड डे मील योजना के लिए सरकार ने वित्तीय वर्ष 2018-19 में करीब साढ़े दस हजार करोड़ रुपये का प्रावधन किया था। योजना के तहत करीब 12 करोड़ छात्रों को स्कूलों में पौष्टिक और गर्म खाना देने की व्यवस्था है।

साफ पानी भी देने की तैयारी : स्कूली छात्रों को पौष्टिक खाने के साथ साफ पानी देने की योजना पर भी सरकार काम कर रही है। नीति आयोग के साथ मानव संसाधन विकास मंत्रलय ने इस पर चर्चा भी की है। अभी ज्यादातर स्कूलों के छात्र आसपास की नदी, तालाब या कुएं का पानी ही पीते हैं।

उपहार का भी देना होगा ब्योरा : स्कूलों को आम लोगों की ओर से बतौर उपहार मिलने वाली खाद्य सामग्री का ब्योरा तैयार करने के लिए भी कहा गया है। गौरतलब है कि इन दिनों देश भर में बच्चों को पोषणयुक्त खाना उपलब्ध कराने के लिए अभियान भी चलाया जा रहा है


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