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05 December 2018

68500 शिक्षक भर्ती मामले में सीबीआई ने दर्ज की एफआईआर, जांच शुरू


हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई लखनऊ की एंटी करप्शन ब्रांच ने की कार्रवाई बेसिक शिक्षा विभाग और परीक्षा नियामक प्राधिकारी इलाहाबाद कार्यालय के अज्ञात अधिकारी आरोपीप्रमुख संवाददाता-राज्य मुख्यालय केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की लखनऊ एंटी करप्शन ब्रांच ने बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक के 68500 पदों पर नियुक्ति के लिए कराई गई परीक्षा में हुई गड़बड़ियों के मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश पर की गई है। इसमें

सीबीआई पूरी भर्ती प्रक्रिया की जांच कर रही है। सीबीआई ने आपराधिक षड्यंत्र, साक्ष्य मिटाने व आपराधिक धोखाधड़ी जैसे गंभीर आरोपों में आईपीसी की धारा 120 बी, 409, 420, 201, 467, 468 व 471 के अलावा भ्रष्टाचार निवारण एक्ट की धारा 13 (1)(ए) व 13(2) के तहत यह एफआईआर दर्ज की है। इसमें बेसिक शिक्षा विभाग के अज्ञात अधिकारियों व कर्मचारियों, भर्ती परीक्षा कराने वाली संस्था ‘परीक्षा नियामक प्राधिकारी एलनगंज इलाहाबाद के अज्ञात अधिकारियों व कर्मचारियों और अन्य अज्ञात सरकारी एवं निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है। मामले में जांच का दायरा काफी व्यापक हो गया है। इसमें सोनिका देवी बनाम उत्तर प्रदेश एवं अन्य की ओर से दायर याचिका (संख्या 24172/2018) पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ की ओर से एक नवंबर 2018 को पारित आदेश को आधार बनाया गया है। सीबीआई के इंस्पेक्टर आरके तिवारी को इस मामले में जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। जांच में सामने आई थीं गड़बड़ियां : प्रदेश के प्राथमिक स्कूलों में सहायक अध्यापकों के 68500 पदों पर नियुक्ति के लिए 23 जनवरी 2018 को विज्ञापन जारी किया गया था। परीक्षा कराने वाली संस्था ‘परीक्षा नियामक प्राधिकारी इलाहाबाद की ओर से 13 अगस्त 2018 को उत्तर माला जारी किया। परीक्षा में अभ्यर्थियों को उत्तर पुस्तिका की कार्बन कॉपी दी गई थी। कई अभ्यर्थियों को उत्तरमाला से मिलान करने पर गड़बड़ी होने का पता चला। अभ्यर्थियों के इन आरोपों के सामने आने के बाद खुद प्रदेश सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाकर पूरे मामले की जांच कराई। परीक्षा में शामिल 12 अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया था कि उनकी कॉपियां बदल दी गईं। दोबारा मू्ल्यांकन कराए जाने पर उन्हें सही अंक दिए गए। इसी तरह जो 23 अभ्यर्थी पहले पास घोषित कर दिए गए थे, वे दोबारा जांच में फेल पाए गए और 24 अभ्यर्थी जो लिखित परीक्षा में फेल कर दिए गए थे, वे पास हो गए। परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने लिखित परीक्षा कराने का जिम्मा जिस संस्था को दिया था, उसने स्वीकार किया कि गलती से कुछ अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिका का पहला पन्ना दूसरे अभ्यर्थी की उत्तर पुस्तिका के शेष पन्नों से साथ अटैच हो गया था।

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