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14 December 2018

बिना योग्यता के अनुदानित कॉलेजों में पढ़ा रहे शिक्षक, शिक्षकों के नियमितीकरण की प्रक्रिया में तथ्य हुए उजागर


बिना योग्यता के अनुदानित कॉलेजों में पढ़ा रहे शिक्षक, शिक्षकों के नियमितीकरण की प्रक्रिया में तथ्य हुए उजागर
प्रयागराज : उच्च शिक्षा निदेशालय के अनुमोदन बिना ही प्रदेश के अशासकीय महाविद्यालयों में मानदेय पर नियुक्त शिक्षकों का नियमितीकरण फंस सकता है। नवंबर माह में निदेशालय ने अभिलेखों का परीक्षण शुरू किया तो ऐसे कई प्रकरण सामने आए थे। कई ऐसे भी शिक्षक हैं जिनकी शैक्षिक अर्हता यूजीसी और यूपीपीएससी की ओर से उनकी नियुक्ति के समय निर्धारित मानक के अनुसार नहीं है। निदेशालय की ओर से परीक्षण के लिए बनी कमेटी इसको लेकर पसोपेश में रही। अंतिम निर्णय शासन को लेना है। निदेशालय ने अपनी रिपोर्ट शासन को भेज दी है।

राज्य सरकार के सात अप्रैल, 1998 के शासनादेश से मानदेय पर भर्ती हुए असिस्टेंट प्रोफेसरों में 700 से अधिक शिक्षकों का नियमितीकरण जल्द होना है। शासन से इसकी औपचारिक घोषणा ही बाकी है।

इन सभी के शैक्षिक अभिलेख जब परीक्षण के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय उप्र में मंगाए गए तो कमेटी के सामने अजब-गजब प्रकरण आए। पता चला कि कानपुर और इसके आसपास जिलों में स्थित अशासकीय महाविद्यालयों में शासनादेश के तहत मानदेय पर शिक्षकों की नियुक्ति तो हो गई लेकिन, कई शिक्षकों की नियुक्ति के लिए निदेशालय से अनुमोदन स्वीकृत होने का पत्र नहीं लगा, जबकि शिक्षकों को मानदेय संबंधित जिलों के कोषागार से ही मिल रहा है। इनकी संख्या फिलहाल निदेशालय की ओर से नहीं बताई गई है। ऐसे भी शिक्षक मिले जिनकी शैक्षिक अर्हता ही असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए नहीं है। निदेशालय के अधिकारियों के अनुसार जिनका अनुमोदन नहीं हुआ उनके बारे में तो तकनीकी पहलुओं को देखते हुए शासन विचार कर सकता है लेकिन, जिनकी शैक्षिक अर्हता यूजीसी से निर्धारित मानक के अनुसार नहीं है उन्हें नियमितीकरण की सूची से बाहर करना पड़ेगा।

इस संबंध में निदेशक उच्च शिक्षा डॉ. प्रीति गौतम का कहना है कि अभिलेख परीक्षण के दौरान मिले सभी प्रकरणों पर रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। अंतिम निर्णय लेकर, शासन की ओर से उनकी नियुक्ति का आदेश ही आना शेष है।

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