02 August 2020

किताबें शिक्षकों से स्कूलों में पहुंचा दीं तो ढुलाई के लाखों कहां गए, जानिए इस पर क्या बोले जिम्मेदार अधिकारी


बेसिक शिक्षा विभाग में ब्लॉक संसाधन केंद्र यानी बीआरसी से स्कूलों तक किताबों की ढुलाई में हुए फर्जीवाड़े की जांच कराने के बजाय पूरा मामला ही दबा दिया गया। हालांकि बीएसए ने अब शिक्षकों के बीआरसी की किताबें लेने पर रोक लगा दी है जबकि सूत्रों का कहना है कि बड़ी संख्या में किताबों को स्कूलों में भेजने के बजाय सीधे अध्यापकों को देकर गड़बड़ी की गई है।


प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल के करीब 3.61 लाख छात्र-छात्राओं के लिए किताबें आई थीं। इन किताबों को बीआरसी से स्कूलों तक पहुंचाने की व्यवस्था करनी थी। किताबों के ट्रांसपोर्टेशन के लिए विभाग को जुलाई में 15.88 लाख रुपये की धनराशि भी आवंटित हुई थी। यह रकम अपनी जेबों में डालने के लिए बीआरसी से किताबों को स्कूलों में भेजने के बजाय शिक्षकों को बुलाकर उन्हें थमा दी गई। शिक्षक अपनी जेब से किराया भुगतने के बाद किताबें स्कूल ले गए, उन्हें परेशानी भी झेलनी पड़ी। यह फर्जीवाड़ा अफसरों की जानकारी में आया लेकिन इस पर कोई जांच तक नहीं बैठाई गई। अधिकारी यह कहर बचाव कर रहे हैं कि अभी पूरी किताबें स्कूलों को नहीं भेजी गई है। फिलहाल बीएसए विनय कुमार ने सभी बीआरसी को पत्र भेजकर निर्देश दिए हैं कि किताबें सीधे स्कूलों तक पहुंचाई जाएं।

शिक्षक संघ उठा चुका है पूरा मामला

उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ ने बीएसएफ के सामने मामला उठाया था कि राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा ने आदेश के तहत पाठ्य पुस्तकों को स्कूलों तक पहुंचाने की व्यवस्था बीईओ को सौंपी गई थी। मंडल अध्यक्ष डॉ. विनोद शर्मा का कहना है कि बीडीओ से इस जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए बीएसए से निर्देश जारी करने के लिए कहा गया था।


बीआरसी से ही किताबों को स्कूलों तक पहुंचाया जाना है इस मामले में अभी कोई जांच तो नहीं की जा रही लेकिन यह निर्देश दे दिया गया है कि किसी शिक्षक को किताबों के लिए बीआरसी पर न बुलाया जाए। -विनय कुमार, बीएसए

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