08 September 2020

नई शिक्षा नीति लागू करने की जिम्मेदारी सबकी व नीति में कम से कम होना चाहिए सरकारी दखल : मोदी

राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर राज्यपालों के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और पीएम मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए संबोधित किया। पीएम मोदी और राष्ट्रपति कोविंद ने नई शिक्षा नीतियों की खूबियों को बताया। पीएम ने कहा कि नई शिक्षा नीति बच्चों को बैग और बोर्ड के बोझ से मुक्त करेगी तो राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षण के पेशे में योग्य लोगों के चयन और रिसर्च पर निवेश बढ़ाया जाएगा। 


-राष्ट्रपति ने कहा- राष्ट्रीय शिक्षा नीति, इक्कीसवीं सदी की आवश्यकताओं व आकांक्षाओं के अनुरूप देशवासियों को, विशेषकर युवाओं को आगे ले जाने में सक्षम होगी। यह केवल एक नीतिगत दस्तावेज नहीं है, बल्कि भारत के शिक्षार्थियों एवं नागरिकों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है। यदि इस नीति के अनुरुप बदलाव कर लिए जाते हैं तो भारत एक शिक्षा महाशक्ति बन जाएगा।

-राष्ट्रपति ने कहा- राष्ट्रीय शिक्षा नीति, परामर्शों की अभूतपूर्व और लंबी प्रक्रिया के बाद तैयार की गई है। मुझे बताया गया है कि इस नीति के निर्माण में, ढाई लाख ग्राम पंचायतों, साढ़े बारह हजार से अधिक स्थानीय निकायों तथा लगभग 675 जिलों से प्राप्त दो लाख से अधिक सुझावों को ध्यान में रखा गया है।

-राष्ट्रपति ने कहा-1968 की शिक्षा नीति से लेकर इस शिक्षा नीति तक, एक स्वर से निरंतर यह स्पष्ट किया गया है कि केंद्र व राज्य सरकारों को मिलकर सार्वजनिक शिक्षा के क्षेत्र में जीडीपी के 6 परसेंट निवेश का लक्ष्य रखना चाहिए। 2020 की इस शिक्षा नीति में इस लक्ष्य तक शीघ्रता से पहुंचने की अनुशंसा की गई है।

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-राष्ट्रीय शिक्षा नीति में यह स्पष्ट किया गया है कि सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली ही जीवंत लोकतान्त्रिक समाज का आधार होती है। अतः सार्वजनिक शिक्षण संस्थानों को मजबूत बनाना अत्यंत आवश्यक है।

-नई शिक्षा नीति में इस बात पर बल दिया गया है कि हम सबको भारतीय जीवन-मूल्यों पर आधारित आधुनिक शिक्षा प्रणाली विकसित करनी है। साथ ही यह भी प्रयास करना है कि सभी को उच्च गुणवत्ता से युक्त शिक्षा प्राप्त हो तथा एक जीवंत व समता-मूलक नॉलेज सोसाइटी का निर्माण हो।

-शिक्षा के माध्यम से हमें ऐसे विद्यार्थियों को गढ़ना है जो राष्ट्र-गौरव के साथ-साथ विश्व-कल्याण की भावना से ओत-प्रोत हों और सही अर्थों में ग्लोबल सिटिजन बन सकें।

-वर्ष 2025 तक प्राथमिक विद्यालय स्तर पर सभी बच्चों को मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान प्राप्त कराना इस शिक्षा प्रणाली की सर्वोच्च प्राथमिकता तय की गई है। इसके आधार पर ही आगे की शिक्षा का ढांचा खड़ा हो सकेगा।

-शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे बुनियादी बदलावों में शिक्षकों की केंद्री भूमिका रहेगी। इस शिक्षा नीति में यह स्पष्ट किया गया है कि शिक्षण के पेशे में सबसे होनहार लोगों का चयन होना चाहिए और उनकी आजीविका, मान-मर्यादा और स्वायत्तता को सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

-इस संदर्भ में शैक्षिक रूप से सुदृढ़, मल्टी-डिसिप्लिनरी और इंटीग्रेटेड टीचर्स एजुकेशन कार्यक्रम शुरू करने का प्रावधान है। वर्ष 2030 तक इस क्षेत्र में केवल उच्च स्तरीय संस्थान ही सक्रिय रह जाएंगे।

-स्कूली शिक्षा को मजबूत आधार देने के लिए 2021 तक, इस शिक्षा नीति पर आधारित, टीचर्स एजुकेशन का एक नवीन और व्यापक पाठ्यक्रम तैयार करने का लक्ष्य है। टीचर्स एजुकेशन, उच्च शिक्षा का अंग है। अतः राज्य स्तर पर आप सबको टीचर्स एजुकेशन से जुड़े अत्यंत महत्वपूर्ण लक्ष्यों को प्राप्त करना है। 

-राष्ट्रपति ने कहा- भारत में व्यावसायिक शिक्षा के प्रसार में तेजी लाने की आवश्यकता को देखते हुए यह तय किया गया है कि स्कूल तथा हायर एजुकेशन सिस्टम में वर्ष 2025 तक कम से कम 50 परसेंट विद्यार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा प्रदान की जाएगी।

-12वीं पंचवर्षीय योजना के आकलन के अनुसार, भारत में वर्कफोर्स के 5 परसेंट से भी कम लोगों ने औपचारिक व्यावसायिक शिक्षा प्राप्त की थी। यह संख्या संयुक्त राज्य अमेरिका में 52 परसेंट, जर्मनी में 75 परसेंट और दक्षिण कोरिया में 96 परसेंट थी।

-इस नीति में यह स्पष्ट किया गया है कि व्यावसायिक शिक्षा को मुख्यधारा की शिक्षा का ही अंग समझा जाएगा और ऐसी शिक्षा को बराबर का सम्मान दिया जाएगा। इससे बच्चों और युवाओं में कौशल वृद्धि के साथ-साथ श्रम की गरिमा के प्रति सम्मान का भाव भी पैदा होगा।

इस शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं, कला और संस्‍कृति को प्राथमिकता दी गई है। इससे विद्यार्थियों में सृजनात्‍मक क्षमता विकसित होगी और भारतीय भाषाओं की ताकत और बढ़ेगी। विविध भाषाओं वाले हमारे देश की एकता को अक्षुण्ण बनाए रखने में इससे मदद मिलेगी।

शिक्षण पद्धति और बाल मनोविज्ञान की दृष्टि से सभी स्‍वीकार करते हैं कि आरंभिक शिक्षा का माध्‍यम मातृभाषा होनी चाहिए। इस सोच के अनुरूप नई शिक्षा नीति में त्रिभाषा सूत्र की संस्‍तुति की गई है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं, कलाओं और संस्कृति के संवर्धन को विशेष महत्व दिया गया है क्योंकि वे भारत की पहचान के साथ-साथ हमारी अर्थ-व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

ऐस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट्स तथा स्पेशल एजुकेशनल जोन्स में गुणवत्ता-पूर्ण उच्च शिक्षण संस्थानों की स्थापना की जानी है। यह सामाजिक तथा आर्थिक रूप से वंचित समूहों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।

वंचित क्षेत्रों में उच्च शिक्षा के लिए वर्ष 2030 तक प्रत्येक जिले में या उसके समीप कम से कम एक बड़ा मल्टी-डिसिप्लिनरी हायर एजुकेशन इन्स्टीट्यूशन उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इसके लिए राज्य स्तर पर अनेक कदम उठाए जाने होंगे। 

 

राष्ट्रपति ने कहा- भारत जैसी बड़ी और जीवंत अर्थ-व्यवस्था को गति प्रदान करने के लिए ‘नॉलेज-क्रिएशन’ और रिसर्च को प्रोत्साहित करना जरूरी है। केंद्र व राज्य सरकारों को रिसर्च तथा इनोवेशन में निवेश का प्रतिशत बढ़ाना होगा।

-यह देखा गया है कि रिसर्च और इनोवेशन में निवेश का स्तर अमेरिका में जीडीपी का 2.8 परसेंट, दक्षिण कोरिया में 4.2 परसेंट और इज़राइल में 4.3 परसेंट है जबकि भारत में यह केवल 0.7 परसेंट है।

-सभी क्षेत्रों में गुणवत्ता युक्त शैक्षिक अनुसंधान को प्रेरित करने के लिए राष्ट्रीय अनुसंधान फ़ाउंडेशन की स्थापना की जाएगी। शोध की संस्कृति को मजबूत बनाने के लिए सभी विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों को राष्ट्रीय अनुसंधान फ़ाउंडेशन के साथ मिल कर काम करना होगा।

-टेक्नॉलॉजी के उपयोग और इंटीग्रेशन से शिक्षण प्रक्रिया में सुधार को गति मिलेगी तथा बेहतर परिणाम निकलेंगे। इसके लिए नेशनल एजुकेशनल टेक्नॉलॉजी फोरम – एन.ई.टी.एफ़. की स्थापना की जाएगी। एन.ई.टी.एफ़. द्वारा राज्य सरकार की एजेंसियों को भी परामर्श उपलब्ध कराया जाएगा।

पीएम मोदी का भाषण
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि शिक्षा नीति की जिम्मेदारी से केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय जुड़े होते हैं, लेकिन यह भी सच है कि शिक्षा नीति में सरकार का दखल कम से कम होना चाहिए। शिक्षा नीति से जितना शिक्षक, अभिभावक और छात्र-छात्राएं जुड़े होंगे, उसकी प्रासंगिकता उतनी ही रहती है। 

-नई शिक्षा-नीति पर 4-5 साल से कम चल रहा था। लाखों लोगों ने अपने सुझाव दिए थे। इसका ड्राफ्ट जो तैयार हुआ था उसके अलग-अलग पॉइंट पर 2 लाख से अधिक लोगों ने सुझाव दिए थे। इतना गहरा इतना व्यापक, विविधिता के बाद जो अमृत निकला है उसकी वजह से हर ओर इसका स्वागत हो रहा है। सबको राष्ट्रीय शिक्षा नीति अपनी शिक्षा नीति लग रही है। सभी के मन में यह भावना है कि यही सुधार तो मैं होते हुए देखना चाहता था। 

-पीएम मोदी ने कहा- राष्ट्रीय शिक्षा नीति सिर्फ पढ़ाई के तौर तरीकों में बदलाव के लिए ही नहीं है। ये 21वीं सदी के भारत के सामाजिक और आर्थिक पक्ष को नई दिशा देने वाली है। ये आत्मनिर्भर भारत के संकल्प और सामर्थ्य को आकार देने वाली है।

-पीएम मोदी ने कहा- आज दुनिया भविष्य में तेजी से बदलते जॉब्स, नेचर ऑफ वर्क को लेकर चर्चा कर रही है। नई शिक्षा नीति देश के युवाओं को भविष्य की आवश्यकताओं के मुताबिक शिक्षा और स्किल्स दोनों मोर्चों पर तैयार करेगी।

- नई शिक्षा नीति में फाउंडेशनल लर्निंग और लैंग्वेज पर फोकस है। इसमें लर्निंग आउटकम और टीचर ट्रेनिंग पर भी फोकस है। इसमें एक्सेस और असेसमेंट को लेकर भी व्यापक रिफॉर्म्स किए गए हैं। इसमें हर स्टूडेंट को एम्पावरकरने का रास्ता  दिखाया गया है। लंबे समय से ये बातें उठती रही हैं कि हमारे बच्चे बैग और बोर्ड एग्ज़ाम के बोझ तले, परिवार और समाज के दबाव तले दबे जा रहे हैं। इस पॉलिसी में इस समस्या को प्रभावी तरीके से अड्रेस किया गया है।

पीएम मोदी ने कहा कि ये शिक्षा नीति, सरकार की शिक्षा नीति नहीं है। ये देश की शिक्षा नीति है। जैसे विदेश नीति देश की नीति होती है, रक्षा नीति देश की नीति होती है, वैसे ही शिक्षा नीति भी देश की ही नीति है।

पीएम मोदी ने कहा- राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भविष्य को ध्यान में रखते हुए व्यापक प्रावधान किए गए है। जैसे-जैसे तकनीक का विस्तार गांवों तक हो रहा है। वैसे-वैसे सूचना और शिक्षा का एक्सेस भी बढ़ रहा है। हमारी जिम्मेदारी है कि हम हर कॉलेज में तकनीकी सॉल्यूशंस को ज्यादा प्रमोट करें।

पीएम ने कहा- उच्च शिक्षा के हर पहलू, चाहे वो अकैडमिक हो, टेक्निकल हो, वोकेशनल हो, हर प्रकार की शिक्षा को साइलो से बाहर निकाला जाए। प्रशासनिक लेयर्स को कम से कम रखा जाए, उनमें अधिक समन्वय हो, ये प्रयास भी इस पॉलिसी के माध्यम से किया गया है।
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