16 October 2020

ऑपरेशन कायाकल्प से अछूते 58 फीसद विद्यालय, बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से आइवीआरएस के जरिये कराई गई पड़ताल में सामने आई हकीकत

हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी स्कूलों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। सीएम स्कूलों और बच्चों को लेकर सदैव संजीदा नजर आते हैं, लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी से परिषदीय विद्यालयों में सुविधाओं का हाल बुरा है। इन विद्यालयों को मूलभूत सुविधाओं से लैस करने के लिए ऑपरेशन कायाकल्प की जोरशोर से डुगडुगी पीटी जा रही है, लेकिन हकीकत यह है कि आधे से ज्यादा स्कूल इससे अछूते हैं। बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से हाल ही में इंटरऐक्टिव वायस रिस्पांस सिस्टम (आइवीआरएस) के जरिये कराई गई पड़ताल में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है।


सूबे के 1,22,583 स्कूलों से की गई पूछताछ में पता चला कि 71,702 यानी 58.5 प्रतिशत विद्यालयों में ऑपरेशन कायाकल्प की कोई गतिविधि ही नहीं संचालित है। जिन स्कूलों में ऑपरेशन कायाकल्प की गतिविधियां ठप हैं, उनमें से 43,709 विद्यालयों (61 प्रतिशत) की ओर से बताया गया कि इसमें ग्राम प्रधान या ग्राम पंचायत सचिव का सहयोग नहीं मिल रहा है। वहीं 25,165 स्कूलों (35 फीसद) की ओर से ग्राम पंचायत निधि में धनराशि की किल्लत को जिम्मेदार ठहराया गया। 3139 विद्यालयों (4.4 प्रतिशत) की ओर से कहा गया कि खंड शिक्षा अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे हैं। यह स्थिति तब है जब शासन ने परिषदीय स्कूलों को सितंबर 2020 तक ऑपरेशन कायाकल्प के तहत 14 मूलभूत सुविधाओं से लैस करने का निर्देश दिया था।

ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में ऑपरेशन कायाकल्प की गतिविधियां राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों पर पंचायतों को मिलने वाली धनराशि से संचालित की जा रही हैं। नगरीय क्षेत्र के स्कूलों में इसके लिए केंद्रीय व राज्य वित्त आयोग, स्मार्ट सिटी फंड, निकाय निधि के इस्तेमाल की व्यवस्था है। जिला खनिज निधि और स्कूलों को मिलने वाली कंपोजिट ग्रांट की धनराशि से भी मरम्मत के कार्य कराये जा सकते हैं।

ऑपरेशन कायाकल्प के लिए अंतरविभागीय समन्वय की जरूरत होती है। हम पंचायती राज विभाग का ध्यान इन तथ्यों की ओर आकर्षित करेंगे। असहयोग करने वाले खंड शिक्षा अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

-डॉ.सतीश चंद्र द्विवेदी, बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)

कायाकल्प के तहत स्कूलों में कराने हैं ये काम

ऑपरेशन कायाकल्प के तहत विद्यालयों में ब्लैक बोर्ड, छात्र-छात्रओं के लिए अलग-अलग शौचालय व मूत्रलय, स्वच्छ पेयजल व मल्टिपल हैंडवा¨शग सिस्टम, स्कूल की दीवारों, छत व दरवाजे-खिड़की, फर्श की मरम्मत, फर्श में टाइल्स लगाना, विद्युतीकरण, किचन शेड का जीर्णोद्धार, फर्नीचर, चहारदीवारी व गेट का निर्माण, विद्यालय प्रांगण में इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाना, अतिरिक्त क्लासरूम का निर्माण आदि कार्य कराये जाने हैं।


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