बेसिक शिक्षकों के प्रमोशन की बजाए चयन वेतनमान की नौबत, फरवरी 2010 के बाद सेवा में आए शिक्षकों का प्रमोशन नहीं, कोर्ट एवं विभागीय आदेशों बने पदोन्नति में रोड़ा

फतेहपुर : जिले के बेसिक शिक्षा विभाग के अन्तर्गत प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत सहायक शिक्षकों की पदोन्नति का इंतजार बढ़ता ही जा रहा है। अब हालात यूं बन रहे हैं कि एक दशक की सेवा के बाद सैकड़ों शिक्षकों को प्रमोशन की बजाए चयन वेतनमान प्रदान करने की नौबत आ गई है। वहीं दूसरी ओर दूसरे जिलों में कहीं तीन वर्ष तो कहीं पांच वर्ष की सेवा के बाद पदोन्नति होने से जिले के शिक्षकों की कुंठा बढ़ती जा रही है।


गत विधान सभा चुनाव के पहले से ही अपने प्रमोशन की मांग कर रहे बेसिक शिक्षकों ने अपने प्रमोशन के लिए पहले चुनावी प्रक्रिया समाप्त होने का इंतजार किया। इसके बाद जब विभाग ने प्रक्रिया शुरू की तो कोई न कोई अड़ंगा सामने आ गया। विभाग ने गत करीब दो वर्ष पूर्व 30 दिसंबर को पहल भी कर दी थी। विभाग ने ब्लाकवार वरष्ठिता सूची को पुनः परीक्षणोपरांत मुख्यालय भेजने के आदेश दिए थे। ब्लॉकों में वरष्ठिता सूची को अंतिम रूप भी दिया जा चुका था। इसके बाद आम चुनाव की रणभेरी बज गई। चुनाव खत्म होने के बाद फिर से पदोन्नति की मांग उठी तो विभाग ने वार्षिक परीक्षा एवं अन्य कामों पर अमल शुरू कर दिया। कई जिलों में शिक्षकों को जहां तीन वर्ष की सेवा में ही पदोन्नति का लाभ मिल गया, वहीं दूसरी ओर इस जिले में फरवरी 2010 के बाद सेवा में आए प्राथमिक  सहायक शिक्षकों को पदोन्नति का लाभ नहीं दिया गया है।

कोर्ट एवं विभागीय आदेशों से भी बाधा
पदोन्नति को लेकर कई तरह के पेंच भी सामने आए। कभी टीईटी की अनिवार्यता को लेकर पेंच फंसा तो कभी समायोजन के बाद पदोन्नति करने जैसे फैसलों ने बाधा पहुंचाई। हाल ही में फतेहपुर समेत फिर से कई जिलों में पदोन्नति प्रक्रिया शुरू किए जाने की मांग संगठन द्वारा की गई है।

अन्तर्जनपदीय तबादले से होगा नुकसान
शिक्षकों का अन्तर्जनपदीय तबादला होने की स्थिति में प्रमोशन न पाने वाले शिक्षकों का खासा नुकसान होगा। दूसरे जिलों में पदोन्नति के बगैर तबादला लेने वाले शिक्षकों की वरिष्ठता प्रभावित हो जाएगी। वह नवीन जनपद में जूनियर माने जाएंगे।