अब दूसरे राज्यों में जाकर नवाचार के गुर सीखेंगे यूपी के शिक्षक, जानें कैसे होगा नामों का चयन


दूसरे राज्यों में जाकर नवाचार के गुर सीखेंगे यूपी के शिक्षक, जानें कैसे होगा नामों का चयन


प्रदेश के गुरुजी भी अब सीखने के लिए दूसरे राज्यों के स्कूलों-प्रतिष्ठित संस्थानों में जाएंगे। वहां के नवाचार देखेंगे और वापस आकर अपने स्कूल-जिले में उसे लागू करेंगे। स्कूल लीडरशिप कार्यक्रम के तहत हर ब्लॉक से सरकारी प्राइमरी या जूनियर स्कूल के एक प्रधानाध्यापक-इंचार्ज शिक्षक का चयन 15 जनवरी तक किया जाएगा। प्रधानाध्यापक के चयन के लिए मानक तय कर दिए गए हैं। ऐसे प्रधानाध्यापकों का चयन होगा, जिनके स्कूल में न्यूनतम 80 से 100 बच्चों का नामांकन हों, पिछले तीन शैक्षिक सत्रों में नामांकन में बढ़ोत्तरी हुई हो। 70 फीसदी बच्चे स्कूल आते हों, सामुदायिक सहयोग से स्कूल में सकारात्मक परिवर्तन किया गया हो, जिला या राज्य स्तर पर पुरस्कृत, स्कूल को ऑपरेशन कायाकल्प के 14 मानकों पर संतृप्त किया हो सैट परीक्षा में 50 फीसदी बच्चे ‘ए-प्लस’ या ‘ए’ श्रेणी में पास हुए हों। 



इसके अलावा भी कई मानक तय किए गए।
ऐसे प्रधानाध्यापकों को वरीयता दी जाएगी जिन्होंने शिक्षकों को नेतृत्व का मौका दिया हो, शिक्षण में सुधार के लिए अपनी योजनाएं बनाते हों, मिशन प्रेरणा के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अपनी कोई योजना हो। सिर्फ ऐसे प्रधानाध्यापकों का ही चयन होगा, जिन्होंने संबंधित स्कूल में तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा किया हो। यदि कोई मॉडल स्कूल का प्रधानाध्यापक है और उसे विकसित करने में प्रधानाध्यापक की कोई भूमिका न हो तो उसका चयन नहीं किया जाएगा। जिन अध्यापकों का नाम भेजा जाएगा उनका राज्य स्तर पर सत्यापन किया जाएगा।