प्रदेश में 30 अप्रैल तक कराएं पंचायत चुनाव: हाईकोर्ट

 प्रयागराज : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मई 2021 तक कराने की चुनाव आयोग की मांग अस्वीकार कर दी है। सख्त रुख अपनाते हुए कोर्ट ने आयोग को 30 अप्रैल तक पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने राज्य सरकार को 17 मार्च तक सीटों का आरक्षण पूरा करने का भी आदेश दिया है।


यह आदेश न्यायमूर्ति एमएन भंडारी व न्यायमूíत आरआर अग्रवाल की खंडपीठ ने विनोद उपाध्याय की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। सीटों का आरक्षण पूरा होने के बाद चुनाव मई तक कराने की जानकारी चुनाव आयोग ने कोर्ट को तीन फरवरी को दी थी। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद-243 के तहत 13 जनवरी कार्यकाल समाप्त होने के पहले चुनाव करा लेना चाहिए था। कोर्ट ने आयोग व राज्य सरकार को समय देने की मांग अस्वीकार करते हुए गुरुवार को सुनवाई कर आदेश देने को कहा था। गुरुवार को कोर्ट ने 30 अप्रैल तक चुनाव कराने का निर्देश दिया है। जनता के वोट से सीधे होने वाले चुनावों के लिए यह आदेश दिया गया है। चुने हुए सदस्यों की ओर से चुनाव के संबंध में भी निर्देश दिए गए हैं। क्षेत्र पंचायत के चुनाव की कार्रवाई भी 15 मई 2021 तक पूरी की जानी है। चुनाव आयोग ने अपने कार्यक्रम में हाईकोर्ट को बताया कि बीती 22 जनवरी को पंचायत चुनाव की मतदाता सूची तैयार हो गई है, जबकि 28 जनवरी तक परिसीमन का काम भी पूरा कर लिया गया है, लेकिन सीटों का आरक्षण राज्य सरकार को करना है। इसी कारण अब तक चुनाव कार्यक्रम जारी नहीं किया जा सका है। आयोग ने बताया कि सभी सीटों का आरक्षण पूरा होने के बाद चुनाव में 45 दिन का समय लगेगा। यूपी सरकार व आयोग ने पंचायत चुनाव समय से पूरा नहीं करा पाने की वजह बताई थी।

’>>17 मार्च तक पूरा करें सीटवार आरक्षण: हाईकोर्ट

’>>13 जनवरी को कार्यकाल पूरा हो चुका है पंचायतों का

कितने थानों में है महिला शौचालय: हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि प्रदेश में कितने थाने हैं, जिनमें महिलाओं के लिए शौचालय हैं। कोर्ट ने यह जानकारी 15 फरवरी तक उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूíत संजय यादव व न्यायमूíत जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने विधि छात्रओं की जनहित याचिका पर दिया है। हाईकोर्ट में विधि छात्रओं ने जनहित याचिका दाखिल की है। याचिका में प्रयागराज शहर के थानों में महिलाओं के लिए शौचालय बनाने व जहां पहले से बने हैं उनकी मरम्मत कराने की मांग की गई है। साथ ही शौचालय बनाने के लिए फंड मुहैया कराने की मांग की गई है।

पाबंदी के दुरुपयोग रोकने को तंत्र विकसित करने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शांतिभंग की आशंका पर पाबंद करने व हिरासत में लेने में पुलिस की मनमानी पर नाराजगी प्रकट की है। प्रदेश सरकार को ऐसा तंत्र विकसित करने का निर्देश दिया है, ताकि निदरेष लोगों का उत्पीड़न रोका जा सके। कोर्ट ने शांति भंग की आशंका में वाराणसी के शिवकुमार वर्मा का अवैध तरीके से चालान करने और दस दिन तक अवैध निरुद्धि में रखने पर एसडीएम वाराणसी से भी जवाब मांगा है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को चार सप्ताह में कार्रवाई कर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी व न्यायमूíत शमीम अहमद की खंडपीठ ने शिवकुमार वर्मा की याचिका पर दिया है। याची का कहना था कि उसे अवैध तरीके से निरुद्धि में रखा गया। दो फरवरी को हाईकोर्ट में पेश हुए सचिव गृह तरुण गाबा ने कोर्ट को बताया कि हाईकोर्ट के निर्देशानुसार सरकार ने आदेश जारी कर दिया है कि भविष्य में कोई भी चालानी रिपोर्ट प्रिंटेड प्रोफार्मा में जारी नहीं की जाएगी। सरकार ऐसा मैकेनिज्म विकसित करेगी और पीड़ित को मुआवजा भी देगी।