सपा सरकार में शिक्षकों के तबादलों पर गिर सकती है गाज:- बीच सत्र में हुए थे स्थानान्तरण, तत्कालीन सचिव पहले ही किए जा चुके निलम्बित


झाँसी : सपा सरकार में शिक्षकों के तबादलों में की गई मनमानी पर अब सतर्कता विभाग का शिकंजा कसने जा रहा है। तत्कालीन सचिव बेसिक शिक्षा के निलम्बन के बाद मुख्यमन्त्री ने प्रदेश के प्रत्येक जनपद में जाँच के आदेश दे दिए हैं। उस समय झाँसी में भी 250 स्थानान्तरण किए गए थे, जिनमें अब अफरा-तफरी का माहौल बन गया है।


बेसिक शिक्षा परिषद में 9 वर्ष तक सचिव रहे संजय सिन्हा पर नियमों के खिलाफ कार्य करते हुए शिक्षकों के अन्तर जनपदीय स्थानान्तरण के आरोप लगे हैं। शैक्षणिक सत्र को स्थानान्तरण के लिए शून्य घोषित करने के बाद भी हजारों शिक्षकों के स्थानान्तरण के आरोप हैं। इस पर शासन ने विभागीय जाँच करायी थी। जाँच में शिकायत सही पाए जाने पर शासन ने तत्कालीन सचिव को निलम्बित कर दिया और सतर्कता जाँच के आदेश दिए हैं। सतर्कता जाँच में प्रयागराज स्थित बेसिक शिक्षा विभाग के सभी पटल सहायकों को भी दायरे में लाया गया है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि यह जाँच धीरे-धीरे कई जनपदों तक पहुँच सकती है।

दरअसल, सपा सरकार में बेसिक विभाग के तत्कालीन निदेशक व तत्कालीन सचिव के कार्यालय से शिक्षकों के अन्तर जनपदीय स्थानान्तरण के आदेश कई जनपदों में आए थे। झाँसी में भी उस दौरान एक वर्ष में ही 250 से अधिक स्थानान्तरण बीच सत्र में हुए थे। उस दौरान एक ही स्थानान्तरण आदेश क्रमांक पर दो या उससे अधिक शिक्षकों के स्थानान्तरण हुए थे। कई स्थानान्तरण के नियम विरुद्ध होने की शिकायत स्थानीय शिक्षक नेताओं ने की थी। अभी तक यह -जाँच ठण्डे बस्ते में पड़ी थी, लेकिन

इस माह के प्रारम्भ में सतर्कता जाँच के आदेश मिलने के बाद अब दोबारा हलचल शुरू हो गयी है। उस समय शिक्षकों का स्थानान्तरण पूरी तरह व्यवसाय हो गया था और अपने गृह जनपद जाने के लिए बोली लगती थी। बेसिक अधिकारी कार्यालय पूरी तरह अन्तर जनपदीय स्थानान्तरण को लेकर सक्रिय हो गए थे उस समय कई स्कूलों में रिक्त स्थान नहीं होने के बाद भी दूसरे जनपदों से आने वाले शिक्षकों को तैनात कर दिया गया। कई विद्यालयों में शिक्षक सरप्लस हो गए, जबकि दूरदराज के विद्यालयों में शिक्षकों की कमी हो गयी थी। इससे शैक्षणिक व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो गयी थी।