कालेजों पर नहीं लगेगा शून्य रिजल्ट का कलंक:- इधर हर साल 100 से अधिक कालेजों का रिजल्ट होता था शून्य, उठते थे पढ़ाई पर सवाल

यूपी बोर्ड की हाईस्कूल व इंटर 2021 में पंजीकृत सभी परीक्षार्थियों की प्रोन्नति का लाभ सिर्फ छात्र-छात्रओं को नहीं मिलेगा, बल्कि 27 हजार से अधिक कालेजों को भी बड़ी राहत मिली है। हर साल 100 से अधिक कालेजों का रिजल्ट शून्य रहता था, जिससे शैक्षिक संस्थानों की किरकिरी होने के साथ ही माध्यमिक स्कूलों की पढ़ाई पर सवाल उठते रहे हैं। वहीं, राजकीय, वित्तविहीन व अशासकीय कालेजों का रिजल्ट प्रतिशत से आकलन होता था। 20 प्रतिशत से कम रिजल्ट वाले कालेज नए छात्र-छात्रओं को प्रवेश के लिए आकर्षित नहीं कर पाते थे।

माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) हर साल हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के परीक्षार्थियों का परिणाम देने के साथ ही अन्य कई तरह के परिणाम जारी करता रहा है। उसका आधार दोनों परीक्षाओं का रिजल्ट प्रतिशत ही होता था। यह क्रम जिले से शुरू होकर बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों तक चलता रहा है। 2019 की हाईस्कूल परीक्षा में 50 राजकीय कालेज ऐसे थे, जिनका रिजल्ट 20 प्रतिशत से कम था, अशासकीय के पांच व वित्तविहीन कालेजों की संख्या 84 रही। वहीं इंटर में 15 राजकीय, 58 अशासकीय व 176 वित्तविहीन कालेजों का परिणाम 20 फीसद से कम रहा। 2020 की हाईस्कूल में 43 राजकीय, पांच अशासकीय व 66 वित्तविहीन तो इंटर में सात शासकीय, 18 अशासकीय व 111 वित्तविहीन कालेजों के 20 प्रतिशत परीक्षार्थी भी उत्तीर्ण नहीं हो सके थे। एक तथ्य यह भी है कि 2020 की परीक्षा में 2601 कालेजों का परिणाम शत-प्रतिशत भी रहा है। इसी तरह से जेलों में बंद कैदियों व बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालयों में भी आगे निकलने की होड़ रहती थी। इस बार प्रोन्नति होने से उस पर पर्दा पड़ गया है।


इन कालेजों का रिजल्ट सिफर

वर्ष >>कालेज

2018 >>150

2019 >>165

2020 >>134


मातृभाषा हिंदी में ही फेल होते थे

हाईस्कूल व इंटर जैसी अहम परीक्षा में मातृभाषा हंिदूी में फेल होने वाले परीक्षार्थियों की संख्या लाखों में रही है। अनिवार्य विषय में अनुत्तीर्ण होने पर सभी फेल हो जाते थे, साथ ही पठन-पाठन पर हर कोई सवाल करता था। ज्ञात हो कि 2018 में दोनों परीक्षाओं में 11 लाख से अधिक, 2019 में 10 लाख से अधिक और 2020 में आठ लाख से अधिक परीक्षार्थी अनुत्तीर्ण हुए थे।

सभी को औसत अंक देने में सबसे बड़ी परेशानी मेधावी 

प्रयागराज : यूपी बोर्ड के हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षाíथयों को प्रोन्नत करने के लिए मंथन चल रहा है। जिलों से परीक्षाíथयों के विषयवार अंक मंगाए गए हैं। सभी को औसत अंक देने में सबसे बड़ी परेशानी मेधावी बने हैं, क्योंकि हर साल परीक्षा परिणाम जारी होने पर लाखों परीक्षार्थी उम्दा अंकों से पास होते रहे हैं। इंटर में तो परीक्षाíथयों को सम्मान सहित के अलावा प्रथम, द्वितीय व तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण किए जाने की परंपरा है। हालांकि इंटर परीक्षाíथयों को अंक देने में 10वीं के अंकों को भी मानक शामिल किया जा रहा है।

यूपी बोर्ड की परीक्षा पहले ही निरस्त हो चुकी है, जबकि इंटर की परीक्षा गुरुवार को निरस्त की गई। दोनों के लिए पंजीकृत परीक्षाíथयों को प्रमोट किया जाना है। उपमुख्यमंत्री ने गुरुवार शाम को ऐलान किया कि प्रोन्नत करने का फार्मूला तैयार हो गया है, लेकिन कुछ घंटे बाद कहा गया कि अपर मुख्य सचिव आराधना शुक्ला की अगुवाई में प्रोन्नत का फार्मूला तय करने की कमेटी बनाई गई है। यकायक तय फार्मूले को टालने की वजह सीबीएसई की ओर से की जा रही देरी है।

इंटर में इस तरह होते रहे उत्तीर्ण

यूपी बोर्ड की 2019 की परीक्षा में 57,000 परीक्षार्थी सम्मान सहित उत्तीर्ण हुए थे। वहीं, प्रथम श्रेणी में 5,26,826, द्वितीय श्रेणी में 8,84,083 और तृतीय श्रेणी में 1,30,685 पास हुए थे। हालांकि वर्ष 2020 में सम्मान सहित उत्तीर्ण परीक्षाíथयों की संख्या में 0.05 फीसद की कमी आयी, जबकि प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण परीक्षाíथयों में 1.94 प्रतिशत की वृद्धि हुई। द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण परीक्षाíथयों के प्रतिशत में 0.03 की कमी आयी व तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण परीक्षाíथयों के प्रतिशत में भी 1.38 प्रतिशत की कमी आयी थी।