बेसिक शिक्षा में एनजीओ के दखल से शिक्षक संगठनों में उबाल, महानिदेशक महोदय ने एनजीओ के सहयोग संबंधित आर्डर किया था जारी



सिद्धार्थनगर :महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरण आनंद ने उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षण कार्य में गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) से सहयोग लेने का फरमान जारी किया है। इसे शिक्षक संगठनों ने अप्रासंगिक बताते हुए विरोध शुरू कर दिया है। कहा कि यदि आदेश अमल में आया तो जनपद के 700 से अधिक उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कंवीजीनियस संस्था कक्षा छह से आठ तक के छात्र-छात्राओं के लिए वाट्सएप आधारित मूल्यांकन और उपचारात्मक अध्ययन मंच नाम से कार्यक्रम संचालित करेगा। आकांक्षी जनपदों में संस्था की ओर से चलाए गए पायलट प्रोजेक्ट में छात्रों को वाट्सएप से जोड़कर साप्ताहिक मूल्यांकन के जरिये उनका शैक्षणिक आंकलन किया तथा विद्यार्थियों को व्यक्तिगत शिक्षण के माध्यम से जिस भी विषय में जो समस्या आ रही थी, उस विषय पर विशेष ध्यान देकर शिक्षण प्रदान किया गया। महानिदेशक ने 24 मई को पत्र भेजकर बीएसए से अपेक्षा की है कि संस्था के प्रस्ताव के अनुसार आगामी दो माह तक कार्य करने के लिए संबंधित खंड शिक्षाधिकारियों और शिक्षकों को निर्देशित करें। ताकि संस्था काम शुरू कर सके। शिक्षक संगठन से जुड़े पदाधिकारियों ने रोष व्यक्त करते हुए अपनी प्रतिक्रिया कुछ यूं दी है।



प्रांतीय उपाध्यक्ष, उप्र प्राथमिक शिक्षक संघ, उप राधेरमण त्रिपाठी का कहना है कि शिक्षकों की भर्ती आरटीई नियमों के तहत की जाती है। बीटीसी, डीएलएड, बीएड आदि करने के बाद टीईटी/सीटीईटी और फिर शिक्षक भर्ती परीक्षा पास करने के बाद कोई शिक्षक बनता है। एनजीओ में पढ़ाने वालों की क्या शैक्षणिक योग्यता है, किसी को पता नहीं। जिलाध्यक्ष पूमा शिक्षक संघ, डा. अरुणेंद्र प्रसाद त्रिपाठी ने बताया कि बेसिक शिक्षा में समय समय पर प्रयोग होते रहे है अब एक बार पुन: एनजीओ द्वारा शिक्षा देने का प्रयास निष्फल होगा। शिक्षक ही शिक्षा के लिए एक मात्र विकल्प है। सरकारें अपनी जिम्मेदारियों से भागना चाहती है। उनकी जिम्मेदारी है कि प्रदेश का प्रत्येक बच्चा अच्छी शिक्षा प्राप्त करे।

प्रदेश संयुक्त मंत्री / जिलाध्यक्ष, राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, आदित्य शुक्ला ने कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग में हर प्रकार से योग्य ,प्रशिक्षित , एवं पर्याप्त शिक्षक हैं तो विभाग द्वारा धन भुगतान कर एनजीओ से क्यों व क्या उम्मीद करके कार्य लिया जाता है। यदि एनजीओ के कर्मचारी इतने ही योग्य हैं तो परीक्षा पास कर अध्यापक क्यों नहीं बन गए। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ इसका विरोध करेगा।

जिलाध्यक्ष, अटेवा, जनार्दन शुक्ल का कहना है कि इतनी कठिन परीक्षाओं को उत्तीर्ण कर कोई शिक्षक बनता है उसके ऊपर एनजीओ को थोपना बहुत ही गलत है । इस प्रस्ताव को तत्काल वापस लिया जाए ,नहीं तो हम सभी शिक्षक आन्दोलन के लिए बाध्य होंगे।