UPTET: यूपीटीईटी का प्रमाणपत्र आजीवन मान्य होने पर 21 लाख को लाभ

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प्रयागराज : केंद्र सरकार ने टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) का प्रमाणपत्र आजीवन मान्य कर दिया है। यदि प्रदेश में एनसीटीई (राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद) का अनुपालन हुआ तो 21 लाख अभ्यर्थियों को लाभ मिल सकता है, क्योंकि केंद्र की तर्ज पर राज्य में भी यूपीटीईटी कराई जा रही है और उसमें अब तक 21 लाख से अधिक उत्तीर्ण हो चुके हैं। हालांकि, सूबे में इस परीक्षा का प्रमाणपत्र पांच वर्ष के लिए ही मान्य है। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री डा. सतीश द्विवेदी ने कहा कि राज्य सरकार इस पर मंथन कर रही है, इससे परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले खुश हैं।


प्राथमिक स्कूलों की शिक्षक भर्ती में आवेदन करने वालों के लिए टीईटी उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। ये प्रमाणपत्र केंद्र का हो या फिर राज्य का। इसके अलावा बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों के शिक्षकों की पदोन्नति में भी हाई कोर्ट ने इस प्रमाणपत्र को अहम बताया है। इसलिए हर वर्ष भर्ती व पदोन्नति के इच्छुक दावेदार बड़ी संख्या में आवेदन करते हैं। वहीं, जिन अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र की वैधता पूरी हो चुकी है और उनका चयन नहीं हुआ है वे भी इस परीक्षा में प्रतिभाग करते हैं। प्रदेश में यदि यूपीटीईटी का प्रमाणपत्र आजीवन मान्य हुए तो दावेदारों की संख्या में कमी आएगी।

2012 में इम्तिहान नहीं, 2020 की प्रक्रिया का इंतजार : एनसीटीई के निर्देश पर टीईटी की शुरुआत 2011 में हुई थी, तब से राज्य में भी यह परीक्षा हो रही है। केंद्र सरकार साल में दो बार, जबकि प्रदेश सरकार वर्ष में एक बार परीक्षा कराती रही है। केवल 2012 में इम्तिहान नहीं हुआ और 2020 की प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार किया जा रहा है।