ऑनलाइन पढ़ाई में बच्चों का राइटिंग खराब होने के साथ कम हो रहा शब्दों का ज्ञान, ये आम कमियां देखने को मिलीं छात्रों में

लखनऊ। महामारी की विपरीत परिस्थितियों में बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई एक सशक्त विकल्प बनकर उभरा है, लेकिन इसके दुष्परिणाम भी बच्चों पर साफ नजर आने लगे हैं। हालांकि ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चे तकनीकी रूप से स्मार्ट हुए हैं, लेकिन शैक्षणिक गुणवत्ता में लगातार कमी आ रही है। बच्चों की लिखावट खराब हो रही है तो शब्दों का ज्ञान भी कम होता जा रहा है।

शिक्षकों की माने तो ऑनलाइन पढ़ाई ने काफी हद तक छात्रों की शिक्षा को संभाला है, लेकिन इससे छात्रों की विभिन्न दक्षता व क्षमता में कमी देखने को मिल रही है। शिक्षकों के अनुसार, छात्र अब सुनना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। राइटिंग और रीडिंग स्किल कम हो रही है। छोटे बच्चे एक पैरे को भी ठीक से नहीं पढ़ पा रहे हैं क्योंकि उन्होंने पूरे बोल-बोल कर पढ़ने और लिखने में रुचि नहीं दिखाई। ऑफलाइन कक्षा में वे हमेशा ब्लैकबोर्ड से अपनी कॉपी में नोट करते रहते थे इससे उनकी राइटिंग स्किल्स में सुधार होता रहता था, लेकिन अब कॉपी में नोट करने की आदत छूट गई है। टाइप कर लिखने की वजह से बच्चों में लंबे वाक्यों को याद करने की क्षमता घट गई है। इससे उनकी याददाश्त भी कमजोर होने लगी है।

सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल, कानपुर रोड की प्रिंसिपल पूनम गौतम बताती हैं कि ऑफलाइन पढ़ाई में छात्रों के दिमाग और हाथ के बीच जो समन्वय देखने को मिलता था, ऑनलाइन पढ़ाई में उसकी कमी खल रही है। जब तक छात्र एक शब्द लिखता है तब तक उसका दिमाग एक पूरा वाक्य सोच लेता है और वहीं पर छात्र के लिखने की रुचि खत्म हो जाती है। ओवरऑल फिजिकल एक्टिविटी में कमी देखने को मिल रही है। जीडी गोयनका पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल रवीन पांडे बताती हैं, ऑनलाइन पढ़ाई से बच्चे तकनीकी रूप से स्मार्ट हुए हैं, लेकिन फिजिकल कक्षाओं में जो तीव्रता उनकी मैनुअल गतिविधियों में देखने को मिलती थी उसमें कमी आई है। छात्रों की याददाश्त कमजोर हुई है। याद करने की क्षमता कम होने के साथ ही जो याद करते हैं वह भी ज्यादा दिनों तक उनके दिमाग में नहीं रह पाता। पढ़ाई के दौरान कॉपी पर नोट करना व लिखने की आदत भी छूट रही है। पायनियर मॉन्टेसरी इंटर कॉलेज की प्रिंसिपल शर्मिला सिंह का भी कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई से राइटिंग और रीडिंग स्किल्स में गिरावट आई है। बच्चे अब लिखना कम पसंद कर रहे हैं। टाइप कर जवाब देना उनको ज्यादा अच्छा लग रहा है। यही वजह है कि उनकी लिखावट भी दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। कॉपी पर लिखने का काम सफाई से होना चाहिए, लेकिन छात्र निपटाऊ काम कर रहे हैं। कॉपी लेकर बैठने की तो आदत की नहीं दिख रही।
अवध कॉलेजिएट की निदेशक जतिंदर वालिया कहती हैं, ऑफलाइन पढ़ाई में सभी छात्र एक साथ बैठते थे तो अधिकांश छात्रों में प्रतिस्पर्धा की भावना दिखती थी। वे घर से पढ़कर आते थे ताकि टीचर कुछ पूछे तो सबसे पहले हाथ उठाकर जवाब दे सकें। अब कक्षाएं उनके कमरे में लग रही हैं तो प्रतिस्पर्धा की भावना भी कम हो गई है। ऑफलाइन कक्षा में टीचर बच्चों के आईक्यू लेवल के अनुसार मेहनत करते थे, लेकिन ऑनलाइन में सभी को एक ही तराजू में तौलना पड़ता है।

सुधार की कवायद तेज
बच्चों में सुधार लाने के लिए स्कूल विभिन्न तरह की गतिविधियां करा रहे हैं। स्कूलों में ऑनलाइन क्राफ्ट व रचनात्मक गतिविधियां तेज हो गई हैं। किसी न किसी दिवस पर छात्रों को हिंदी व अंग्रेजी में प्रस्तुति देनी पड़ती है। डांस, म्यूजिक व योगा की क्लास भी ऑनलाइन चलाई जा रही है। हर बच्चे से अनिवार्य रूप से ऑनलाइन रीड कराया जाने लगा है। ओरल टेस्ट ज्यादा होने लगे हैं। क्लास के बीच में ही बच्चों से संबंधित टॉपिक के बारे में पूछा जाने लगा है।
ये आम कमियां देखने को मिलीं छात्रों में
- बच्चों में लिखने और पढ़ने की रफ्तार काफी कम हुई।
- हैंडराइटिंग भी काफी खराब हुई, निपटाऊ काम कर रहे बच्चे।
- याद करने और याद रखने की भी क्षमता घट गई है। लंबे पैरा याद नहीं कर पाते, न ही याद रख पाते।
- प्रतिस्पर्धा की भावना कम हो रही। फिजिकल क्लास में जवाब देने में एक-दूसरे से आगे रहते थे छात्र
- शब्दकोश नहीं बढ़ रहा। पढ़ने की आदत कम होने से नए शब्दों का ज्ञान हुआ कम।
- कुछ समझ नहीं आए तो पूछने की आदत भी घटी, शिक्षक के पूछने पर जवाब नहीं दे पाते।
- स्किल्स बढ़ाने के लिए दीए जाने वाले अतिरिक्त होमवर्क को गंभीरता से नहीं ले रहे।