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34 प्रस्तावों को योगी कैबिनेट ने सोमवार को दी मंजूरी, देखें किन-किन प्रस्तावों पर लगी मुहर

लखनऊ : विधानसभा चुनाव से ठीक पहले योगी सरकार ने गांव, गरीब और किसान को ध्यान में रखते हुए बड़ा निर्णय लिया है। नगर निकाय में शामिल किए गए नए ग्रामीण क्षेत्रों को सरकार ने सभी टैक्स से छूट दे दी है। समय सीमा का उल्लेख न करते हुए कहा गया है कि जब तब उन क्षेत्रों में अवस्थापना सुविधाएं विकसित नहीं हो जातीं, तब तक टैक्स नहीं लिया जाएगा। इसका लाभ प्रदेश के सैकड़ों गांवों में लाखों की आबादी को मिलेगा।


लगभग छह माह बाद प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सरकार विभिन्न वर्गो को ध्यान में रखते हुए नीतिगत फैसले ले रही है। ऐसा ही एक अहम प्रस्ताव सोमवार को कैबिनेट की बैठक में रखा गया। उल्लेखनीय है कि सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में उनके सरकारी आवास पर हुई कैबिनेट की बैठक में कुल 34 प्रस्ताव मंजूर किए गए।

योगी सरकार ने जनप्रतिनिधियों की मांग के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को देखते हुए कई नगर निगम और नगर पालिका परिषद का सीमा विस्तार किया है। सैकड़ों गांवों को नगर निकायों में शामिल किया गया है। यह सारी प्रक्रिया त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के पहले हो चुकी थी। अब अपने-अपने नियमों के मुताबिक निकाय और विभागों ने इन क्षेत्रों में गृह कर, जल कर, शहरी टैरिफ से बिजली बिल आदि की वसूली के लिए नोटिस देना शुरू कर दिया।

अभी तक इन क्षेत्रों में संबंधित निकायों द्वारा किसी भी प्रकार का विकास नहीं कराया गया है, ऐसे में जनता में नाराजगी थी। कई जगहों से इस पर आपत्ति आ रही थी। इन हालात को देखते हुए योगी सरकार ने कैबिनेट के जरिये इस प्रस्ताव को मंजूररी दी है। सरकार के प्रवक्ता व एमएसएमई मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि प्रस्ताव स्वीकृत कर दिया गया है। इसके तहत जब तक इन नए शामिल ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी व सीवर आदि की आधारभूत सुविधाएं विकसित नहीं हो जातीं, तब तक यहां टैक्स नहीं लगेगा। कोई विभाग नोटिस जारी नहीं करेगा। संबंधित सामग्री 12


’>>सरकार कर चुकी है नगरीय निकायों का सीमा विस्तार

’>>विधानसभा चुनाव से पहले लाखों की आबादी को मिलेगी बड़ी राहत

’>>गृह कर, जल कर, शहरी टैरिफ से बिजली बिलों की वसूली के लिए जारी किए जा रहे थे नोटिस

राज्य ब्यूरो, लखनऊ : प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश जल निगम को ग्रामीण व शहरी, दो हिस्सों में बांटने का निर्णय किया है। कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई। जल निगम की वित्तीय हालत सुधारने के लिए सरकार ने यह फैसला किया है। ग्रामीण क्षेत्रों की पेयजल आपूर्ति सहित अन्य काम जल निगम ग्रामीण देखेगा। यह जल शक्ति तथा बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधीन होगा, जल निगम शहरी पहले की तरह नगर विकास विभाग के अधीन होगा।

जल निगम की वर्तमान में माली हालत ठीक नहीं है। साथ ही कई प्रदेशों में शहरी व ग्रामीण जल निगम पहले से संचालित हैं। इसलिए प्रदेश सरकार ने भी जल निगम को दो हिस्सों में विभाजित करने का निर्णय लिया है। इसके लिए प्रदेश सरकार उत्तर प्रदेश जल संभरण तथा सीवर व्यवस्था अधिनियम 1975 में संशोधन का प्रस्ताव विधान मंडल में पेश करेगी। प्रमुख सचिव नगर विकास, प्रमुख सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास, प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन, उत्तर प्रदेश जल निगम नगरीय के पदेन सदस्य होंगे। इसी प्रकार प्रमुख सचिव पंचायती राज, प्रमुख सचिव नमामि गंगे एवं ग्रामीण जलापूर्ति, प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास, उत्तर प्रदेश जल निगम ग्रामीण के पदेन सदस्य होंगे। निदेशक स्थानीय निकाय, उत्तर प्रदेश जल निगम शहरी तथा निदेशक पंचायती राज उत्तर प्रदेश जल निगम ग्रामीण के पदेन सदस्य होंगे। प्रस्तावित विधेयक में दोनों जल निगमों के कार्यक्षेत्र एवं कृत्यों को निर्धारित किया गया है।

जल निगम की वित्तीय हालत सुधारने के लिए सरकार का फैसला, विधानमंडल में आएगा अधिनियम में बदलाव का प्रस्ताव

लखनऊ : यूपी के किसानों को अब बीज पर विशेष अनुदान मिलेगा। सोमवार को मुख्यमंत्री योगी की अध्यक्षता में मंत्रिपरिषद की बैठक में इस पर मुहर लग गई है। सूबे के किसानों को धान पर 250 व गेहूं के बीज पर 400 रुपये प्रति ¨क्वटल विशेष अनुदान दिया जाएगा। ये सौगात इसी वित्तीय वर्ष से लागू हो रही है, जो आगे भी प्रभावी रहेगी। इस पहल से किसान केंद्रीय योजनाओं के बराबर अनुदान पा सकेंगे।

बीज ग्राम योजना के तहत गेहूं व धान के बीज पर अन्य केंद्रीय योजनाओं के बराबर अनुदान नहीं मिल रहा था। इसीलिए विशेष अनुदान की नई व्यवस्था शुरू की जा रही है। केंद्र सरकार की योजनाओं जैसे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, पूर्वी भारत में हरित क्रांति के विस्तार की योजना, एकीकृत धान्य विकास कार्यक्रम के तहत धान व गेहूं बीज वितरण पर कृषकों को मूल्य का 50 प्रतिशत व अधिकतम दो हजार रुपये प्रति ¨क्वटल जो भी कम हो, अनुदान अनुमन्य है। सूबे में बीज ग्राम योजना के तहत धान व गेहूं के बीजों के वितरण पर मूल्य का 50 प्रतिशत व अधिकतम 1,750 रुपये प्रति ¨क्वटल धान पर व 1,600 रुपये प्रति ¨क्वटल गेहूं पर अनुदान दिया जाता रहा है। योगी सरकार ने अब विशेष अनुदान की व्यवस्था की है। इसका उद्देश्य कृषकों के माध्यम से उन्नतिशील प्रजातियों के बीजों का उत्पादन करके उन्हें प्रोत्साहित करना, उत्पादन व उत्पादकता में वृद्धि करना और अनुदान पर विभिन्न फसलों के उन्नतशील प्रजातियों के बीज अधिकाधिक किसानों को उपलब्ध कराना है। अब गेहूं व धान के बीज मूल्य पर अन्य केंद्रीय योजनाओं के बराबर अनुदान की धनराशि दो हजार रुपये प्रति ¨क्वटल रहेगी।

बाजार से अधिक कर्ज ले सकेगी सरकार: बढ़ते खर्च से पार पाने के लिए राज्य सरकार अब बाजार से अधिक कर्ज ले सकेगी। कैबिनेट बैठक में सरकार ने तय किया है कि वित्तीय वर्ष 2021-22 में सरकार सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के चार फीसद की अधिकतम सीमा तक कर्ज ले सकेगी। वहीं 2022-23 से 2025-26 तक कर्ज लेने की अधिकतम सीमा जीएसडीपी का 3.5 प्रतिशत होगी। कैबिनेट बैठक के बाद राज्य सरकार के प्रवकता व एमएसएमई मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने यह जानकारी दी।

अब 13 हवाई पट्टियों में मिलेगा उड़ान का प्रशिक्षण

योगी कैबिनेट ने ‘उड्डयन के क्षेत्र में प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए फ्लाइंग क्लब व अकादमियों को हवाई पट्टियों के उपयोग की नीति’ को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके तहत प्रदेश की कुल 13 हवाई पट्टियों व उनकी परिसंपत्तियां को उड्डयन के क्षेत्र में प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने के लिए अनुमति दी गई है। इन हवाई पट्टियों में अकबरपुर (अंबेडकरनगर), अंधऊ (गाजीपुर), श्रवस्ती, फरुखाबाद, धनीपुर (अलीगढ़), अमहट (सुलतानपुर), म्योरपुर (सोनभद्र), सैफई (इटावा), पलिया (खीरी), झांसी, रसूलाबाद (कानपुर देहात), आजमगढ़ व चित्रकूट शामिल हैं।

   विध्यवासिनी देवी मंदिर के लिए 128 करोड़ की परियोजनाएं मंजूर

मीरजापुर में ¨विध्यवासिनी देवी मंदिर और वहां जाने वाले रास्तों व गलियों के कायाकल्प के लिए महंगी निर्माण सामग्रियों के इस्तेमाल को मंजूरी देने के साथ सरकार ने कुल 128 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है। कैबिनेट बैठक में इन परियोजना प्रस्तावों पर मुहर लगी। ¨वध्यवासिनी मंदिर को जाने वाले रास्तों को जोड़ने वाले मार्गाें के निर्माण और मरम्मत से संबंधित परियोजना के लिए 40.38 करोड़ रुपये, मंदिर के परकोटा व परिक्रमा पथ के निर्माण के लिए 45.75 करोड़ रुपये तथा गलियों के सुंदरीकरण के लिए 41.87 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। कैबिनेट ने परियोजना पर आगे की कार्यवाही के बारे में निर्णय लेने के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है।

सोसाइटी करेगी इंस्टीट्यूट आफ फोरेंसिक साइंसेस का संचालन

लखनऊ में बन रहे उप्र स्टेट इंस्टीट्यूट आफ फोरेंसिक साइंसेस का संचालन सोसाइटी के तहत होगा। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव पर मुहर लगा दी है। सोसाइटी का पंजीकरण कराया जाएगा। अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव, गृह सोसाइटी के अध्यक्ष तथा डीजीपी उपाध्यक्ष होंगे। सदस्य सचिव सोसाइटी के निदेशक होंगे। इसके अलावा डा.एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू), लखनऊ के कुलपति या उनके द्वारा नामित प्रतिनिधि तथा फोरेंसिक साइंस के तीन विशेषज्ञ सोसाइटी के सदस्य होंगे।

सदन में पेश की जाएगी बिकरू कांड की रिपोर्ट

कैबिनेट ने कानपुर के बहुचर्चित बिकरू कांड की जांच के लिए उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश डा.बीएस चौहान की अध्यक्षता में गठित आयोग की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखे जाने की मंजूरी दी है। कानपुर के बिकरू गांव में कुख्यात विकास दुबे व उसके साथियों ने पिछले साल दो जुलाई की रात सीओ समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी। बाद में पुलिस ने विकास दुबे व उसके साथियों को मुठभेड़ में मार गिराया था। मामले में विभिन्न ¨बदुओं की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच आयोग का गठन हुआ था।


अन्य प्रमुख फैसले

’जिला खनिज फाउंडेशन न्यास में नामित हो सकेंगे सांसद व विधायक

’नागरिक उड्डयन में चार नए पद सृजित किए गए।

’देवरिया में शहीद रामचंद्र विद्यार्थी के नाम पर बनेगा संग्रहालय

’उप्र मलिन बस्ती क्षेत्र (सुधार एवं निपातन) अधिनियम, 1962 में प्रथम संशोधन

’अब दस लाख तक के बुक वैल्यू के जर्जर भवनों को गिराने का फैसला कर सकेंगे विभाग

’सरकार 31 मार्च 2019 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के लिए भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट को विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत करेगी।

’राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में आरआरटीएस की दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कारिडोर परियोजना से आच्छादित परिवहन निगम के भवनों को दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए तीन एकड़ भूमि निश्शुल्क दी

’उप्र ग्रामीण अभियंत्रण विभाग में अब अवर अभियंता (प्राविधिक) के पद पर अब बीटेक व समकक्ष शैक्षिक योग्यता वाले अभ्यर्थियों की भी भर्ती होगी। इसके लिए ड्राइंग अधिष्ठान सेवा नियमावली-1983 के संसोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दी

’देवरिया के कृषि ज्ञान केंद्र को भूमि

’उप्र औद्योगिक शांति (मजदूरी का यथासमय संदाय) अधिनियम, 1978 में संशोधन को मंजूरी

’उप्र निजी विश्वविद्यालय अधिनियम 2019 में संशोधन पर मुहर।


स्मारक मित्र करेंगे स्मारकों का रखरखाव
 लखनऊ : सरकार ने अब पुरातात्विक महत्व वाले स्मारकों के रखरखाव के लिए केंद्र की तर्ज पर ‘एडाप्ट ए हेरिटेज नीति’ के तहत ‘अपनी धरोहर, अपनी पहचान’ को प्रदेश में भी लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत स्मारक मित्र बनाए जाएंगे, जो सीएसआर फंड से स्मारकों का रखरखाव करेंगे।

‘उप्रEOFप्ट ए हेरिटेज नीति’ को कैबिनेट ने सोमवार को मंजूरी दे दी। इसके तहत उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व निदेशालय (संस्कृति विभाग) द्वारा संरक्षित स्मारकों/पुरास्थलों का स्थलीय विकास, रखरखाव और जन सुविधाओं का प्रबंधन सार्वजनिक उद्यम इकाइयों व निजी क्षेत्र की सहभागिता से किया जाएगा। संरक्षित स्मारकों/पुरास्थलों को विकसित करने के लिए निजी क्षेत्र के उद्यमियों को स्मारक मित्र बनाया जाएगा। चयनित स्मारक मित्र अपने संसाधनों से स्मारकों का स्थलीय विकास, पर्यटकों के लिए स्मारक परिसर में जनसुविधा प्रबंधन और वार्षिक रखरखाव आदि की व्यवस्था करेंगे। स्मारक मित्र के लिए उप्र राज्य पुरातत्व निदेशालय (संस्कृति विभाग), पर्यटन विभाग और संबंधित जिलाधिकारी के बीच एमओयू होगा, जिसकी अधिकतम अवधि पांच वर्ष होगी। प्रस्तावित काम संस्कृति विभाग (उप्र राज्य पुरातत्व निदेशालय) और पर्यटन विभाग द्वारा संबंधित जिलाधिकारी के माध्यम से पारस्परिक सहयोग से किया जाएगा। योजना के क्रियान्वयन के लिए संस्कृति विभाग और पर्यटन विभाग की एक संयुक्त समिति बनाई जाएगी। कैबिनेट ने पहले चरण में राज्य पुरातत्व विभाग के 11 प्रमुख स्मारकों/पुरास्थलों का चयन स्मारक मित्र बनाने के लिए करने के प्रस्ताव को भी अनुमति दे दी। इन स्मारकों में लखनऊ के कैसरबाग स्थित छतरमंजिल एवं फरहत बख्श कोठी, कोठी गुलिस्ताने इरम, दर्शन विलास कोठी, हुलासखेड़ा उत्खनन स्थल मोहनलालगंज, कुसुमवन सरोवर गोवर्धन मथुरा, गोवर्धन की छतरियां, रसखान समाधि गोकुल मथुरा, गुरुधाम मंदिर वाराणसी, कर्दमेश्वर महादेव मंदिर कंदवा वाराणसी, चुनार किला मीरजापुर और प्राचीन दुर्ग बरुआसागर झांसी शामिल हैं।

नगरीय निकायों में समायोजित होंगे जल निगम के अतिरिक्त कर्मी
लखनऊ : जल निगम के अतिरिक्त कर्मियों को स्थानीय निकायों में बाडीशा¨पग के आधार पर प्रतिनियुक्ति के आधार पर तैनात किया जाएगा। जल निगम के मृतक आश्रितों को भी स्थानीय निकायों में नियुक्ति प्रदान की जाएगी। कैबिनेट ने इस प्रस्ताव को पास कर दिया। प्रतिनियुक्ति पर रखे जाने वाले कर्मियों को निर्धारित आयु सीमा तथा प्रतिनियुक्ति की अवधि की सीमा से मुक्त रखा जाएगा। वह नगरीय निकायों में आवश्यकतानुसार सेवानिवृत्त होने तक कार्य कर सकेंगे। जल निगम के इन कर्मियों के कार्य, अनुभव एवं दक्षता के आधार पर पदों की अर्हता के संबंध में यथा संभव शिथिलता प्रदान की जाएगी। इन्हें जल निगम में मिल रहे वेतन के बराबर धनराशि मिलेगी।

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