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तय समय पर करनी होगी शिक्षकों की प्रोन्नति, विवि को दिए निर्देश

 लखनऊ : विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत किए जाने वाले प्रमोशन में देरी के कारण बढ़ रहे विवादों पर राजभवन सख्त हो गया है। राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल के अपर मुख्य सचिव महेश गुप्ता की ओर से सभी विश्वविद्यालयों को तय समय पर प्रमोशन की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। विश्वविद्यालयों से इस सबंध में रिपोर्ट भी मांगी गई है।


प्रदेश के विश्वविद्यालयों में करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत प्रमोशन की प्रक्रिया वर्षो लटकी रहती है। ऐसे में एसोसिएट प्रोफेसर व प्रोफेसर के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती के माध्यम से नियुक्त शिक्षकों को पहले प्रोन्नति मिल जाती है। इसे लेकर विश्वविद्यालयों में तमाम विवाद खड़े हो रहे हैं। कौन शिक्षक वरिष्ठ है, इसे लेकर कई बार कोर्ट तक मामला चला जाता है। बीते दिनों एक विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर वरिष्ठता को लेकर छिड़ा विवाद राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग तक पहुंच गया। इसमें विश्वविद्यालय के साथ-साथ कुलाधिपति कार्यालय को भी आयोग के समक्ष उपस्थित होकर पक्ष रखना पड़ा। यही नहीं तमाम शिक्षक अन्य राज्यों की सेवाओं, स्वावित्तपोषित संस्थाओं की सेवाओं तथा तदर्थ सेवाओं के अनुभव को विभागाध्यक्ष, संकायाध्यक्ष व प्राचार्य के पद पर प्रोन्नति के लिए जोड़ने का आग्रह करते हैं। ऐसे में विवाद खड़े होते हैं। विश्वविद्यालय स्तर पर ही इन विवादों का निस्तारण किए जाने के भी निर्देश दिए गए हैं। मालूम हो कि असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर लेवल 10 से लेवल 11 पर चार साल में व असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर ही लेवल 11 से लेवल 12 पर पांच साल में प्रोन्नति मिलती है। उधर लेवल 12 से लेवल 13 ए पर असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर पद पर तीन साल बाद और एसोसिएट प्रोफेसर से प्रोफेसर पद पर यानी लेवल 14 पर तीन साल में प्रोन्नति दी जाती है, लेकिन इसमें देरी होने पर विवाद खड़े हो रहे हैं।