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तीस परिषदीय स्कूलों में 15 दिन तक नहीं जले चूल्हे, बीएसए को दिए मिड डे मील के क्रियान्वयन के निर्देश

 गोरखपुर : परिषदीय स्कूलों में सख्ती के बाद भी मिड डे मील योजना के क्रियान्वयन में शिथिलता सामने आई है। दैनिक अनुश्रवण प्रणाली (आइवीआरएस) के जरिए मध्याह्न् भोजन प्राधिकरण द्वारा प्रदेश के सभी जनपदों में 1 से 15 सितंबर तक प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्कूलों की समीक्षा में जनपद में तीस स्कूल ऐसे मिले हैं, जहां एक दिन भी भोजन नहीं बना है। प्राधिकरण ने ऐसे जिलों की सूची जारी करते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।


प्राधिकरण निदेशक ने बीएसए को बच्चों को भोजन नहीं देने पर संबंधितों के विरुद्ध उत्तरदायित्व का निर्धारण करते हुए तत्काल मिड डे मील का वितरण सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है। हालांकि विभाग का दावा है कि जिन स्कूलों में मध्याह्न् भोजन नहीं बना है, वह बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के स्कूल हैं। कोरोना संक्रमण के चलते लंबे समय तक स्कूल बंद थे। पठन-पाठन के साथ ही मिड डे मील का संचालन भी बंद हो गया था। शासन के निर्देश पर 23 अगस्त से छठीं से आठवीं तक तथा एक सितंबर से कक्षा एक से पांचवीं तक की कक्षाओं का संचालन शुरू हो गया है। तबसे स्कूलों में नियमित मिड डे मील योजना का संचालन हो रहा है।

कितने स्कूलों में नहीं बना भोजन : प्राधिकरण की 1 से 15 सितंबर तक की समीक्षा में जिन 30 स्कूलों में भोजन नहीं बनने की बात सामने आई है, उनमें बांसगांव के आठ, बड़हलगंज, पिपरौली व ब्रह्मपुर के पांच-पांच, जंगल कौड़िया के दो, कौड़ीराम के चार तथा सहजनवां का एक स्कूल शामिल हैं।

’>>मध्याह्न् भोजन प्राधिकरण की समीक्षा में सामने आया मामला

’>>बीएसए को दिए मिड डे मील के क्रियान्वयन के निर्देश

आपदा प्रबंधन से प्राप्त सूची के अनुसार जिन स्कूलों में पंद्रह दिन में एक दिन भी भोजन न बनने का मामला सामने आया है, वह सभी स्कूल बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के हैं। यहां जलभराव व मैरुंड होने के कारण पठन-पाठन के साथ ही मिड डे मील भी प्रभावित रहा। अब पुन: संचालन शुरू हो गया है। सूचना प्राधिकरण को प्रेषित कर दी गई है।

दीपक पटेल, जिला समन्वयक, मिड डे मील