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प्रदेश में 70 प्रतिशत शिक्षक कक्षा छह से आठ तक तीनों विषय पढ़ा रहे

सूबे की बेसिक शिक्षा पर सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद कहीं न कहीं कमी बनी हुई है। राज्य सरकार की ओर से समग्र शिक्षा अभियान 2021-22 के लिए भेजी गई रिपोर्ट पर गौर करने से साफ है कि उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर नहीं की जा सकी है।



स्थिति यह है कि कक्षा छह से आठ तक के 70 प्रतिशत शिक्षक तीनों विषय (भाषा, गणित/विज्ञान और सामाजिक विषय) पढ़ा रहे हैं। सामाजिक विषय में 1183 छात्र-छात्राओं पर एक शिक्षक उपलब्ध है। शिक्षकों की कमी का मुख्य कारण उच्च प्राथमिक स्तर पर सीधी भर्ती और प्रमोशन न होना है।

आखिरी बार उच्च प्राथमिक स्तर पर 2013 में विज्ञान व गणित विषय के 29334 सहायक अध्यापकों की भर्ती हुई थी। उसके बाद से भर्ती न होने और तमाम जिलों में प्रमोशन न होने के कारण इन स्कूलों में शिक्षकों के 9451 पद खाली हैं।

माध्यमिक स्कूलों में सामाजिक विषय का पीटीआर 252

शिक्षकों के मामले में माध्यमिक स्कूलों की स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं है। राजकीय माध्यमिक स्कूलों में सामाजिक विषय का पीटीआर (छात्र शिक्षक अनुपात) 252 है। यानि 252 शिक्षकों पर एक शिक्षक उपलब्ध है। विज्ञान में 230 बच्चों पर एक शिक्षक हैं। राजकीय स्कूलों में 2018 में शुरू हुई शिक्षकों की भर्ती ही अब तक पूरी नहीं हो सकी है। इसके चलते खाली हुए शिक्षकों के पद भरने के लिए नया विज्ञापन जारी नहीं हो पा रहा।

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