नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी में चार लोग गिरफ्तार, बीटेक पास है सरगना

 लखनऊ : सैकड़ों बेरोजगारों को सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर छह करोड़ से अधिक की ठगी करने वाले गिरोह के सरगना समेत चार जालसाजों को एसटीएफ की टीम ने गुरुवार को विभूतिखंड क्षेत्र से गिरफ्तार कर लिया।


गिरोह का सरगना अरुण कुमार दुबे बीटेक पास है। वह कई मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी भी कर चुका है। एडीजी एसटीएफ अमिताभ यश ने बताया कि गिरोह के लोगों ने 500 से अधिक बेरोजगारों से ठगी की। जालसाजों ने कृषि कुंभ प्राइवेट लिमिटेड, मदर हुड केयर कंपनी के नाम से वेबसाइट बना रखी थी और एनजीओ भी खोल रखा था।

कई विभागों की मुहर और मोबाइल फोन बरामद: आरोपित अरुण ने गोरखपुर स्थित मदन मोहन मालवीय इंजीनियरिंग कालेज से बीटेक किया है। वह इंदिरानगर का रहने वाला है। गिरफ्तार अन्य आरोपितों में दारुलशफा स्थित विधायक निवास में रहने अनिरुद्ध पांडेय, अलीगंज सेक्टर डी का खालिद मुनव्वर बेग और गोमतीनगर के विनयखंड का अनुराग मिश्र हैं। इनके पास से विधानसभा सचिवालय का पास, 22 फाइलें, कई विभागों की मुहर, मोबाइल फोन, नौ एटीएम और अन्य दस्तावेज मिले हैं। अनिरुद्ध पांडेय जालसाज कंपनी में फाइनेंस का काम देखता था।

नौकरी के लिए वेबसाइट पर देते थे विज्ञापन, कराते थे बड़े-बड़े सेमिनार: एसएसपी एसटीएफ हेमराज सिंह मीणा ने बताया कि सरगना अपनी कंपनी के नाम से बनी वेबसाइट पर विभिन्न विभागों में नौकरी का विज्ञापन देता था। आवेदन आने पर लोगों को फोन कर बुलाता था। सरकारी नौकरी के नाम पर प्रति व्यक्ति चार से पांच लाख रुपये लेता था। फिर फर्जी नियुक्तिपत्र देकर उन्हें ज्वाइन करने को भेजता था। उसके खिलाफ इंदिरानगर, विभूतिखंड के अलावा कई अन्य जनपदों में भी मुकदमे दर्ज हैं। जालसाज लोगों को विश्वास में लेने के लिए सेमिनार भी कराते थे। इसकी चकाचौंध देख लोग इनपर विश्वास कर लेते थे। गिरोह के सदस्य पंकज, देवेश मिश्र, विनय शर्मा, देव यादव, शशांक गिरि समेत अन्य की तलाश की जा रही है। यह लोग लोगों बेरोजगारों को खोजते थे।


लैपटाप व बैटरी चोरी के मामले में निकाला गया था सरगना

एसएसपी एसटीएफ ने बताया कि अरुण दुबे ने वर्ष 2005 में बीटेक किया था। इसके बाद उसने 2015 में रिलायंस, टाटा व जीटीएल समेत कई कंपनियों में नौकरी की। वह मैनेजर के पद पर था। इस दौरान एक कंपनी से 10 लैपटाप और बैटरी चुराए थे। जांच में यह राजफाश हुआ तो कंपनी के मुकदमा दर्ज करा दिया। वर्ष 2016 में अरुण जेल गया था। 2017 में वह छूटा तो अपनी कंपनी बनाकर जालसाजी करने लगा।