बेसिक शिक्षा: ठंड तो आ गई पर नहीं आए स्वेटर, जूते के इंतजार में घिस गए चप्पल, तकनीकी दिक्कत परेशानी का सबब

वाराणसी: शासन ने परिषदीय स्कूलों के बच्चों को निशुल्क ड्रेस, जूते, मोजे और स्वेटर ठंड से पहले देने का दावा किया था। नवंबर शुरू होने को है, लेकिन बच्चों को अभी तक कुछ नहीं मिला। ठंड ने दस्तक दे दी है। बच्चे बिना जूते और मोजे के स्कूल आ रहे हैं। हालांकि, सुबह की ठंड को देख शासन ने एक अक्तूबर से विद्यालय का समय सुबह नौ से दोपहर तीन बजे तक कर दिया है। लेकिन आने वाले समय में ठंड और बढ़ेगी, जिसके बाद बच्चों को स्वेटर की जरूरत पड़ेगी। सुबह ठंड के दौरान परिषदीय विद्यालय के बच्चे बिना जूते, मोजे के आ रहे है। वहीं, प्राथमिक विद्यालय नरउर व प्राथमिक विद्यालय जगतपुर में बच्चे दरी पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। उनके लिए टेबल तक की व्यवस्था नहीं है।


शासन ने इस बार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) मॉड्यूल से अभिभावकों के बैंक खाते में 1056 रुपये भेजने का फैसला किया था। ठंड के बीच जिले के 1144 परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले एक लाख 94 हजार बच्चों के साथ सहायता प्राप्त व मदरसे के बच्चों को यूनिफार्म, जूते, मोजे व स्वेटर का इंतजार है। शासन से जिले के दो लाख 22 हजार बच्चों के लिए 24 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत हुई है।

तकनीकी दिक्कत परेशानी का सबब
डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के तहत अभिभावकों के खातों की जिला स्तर पर पंजीकरण की प्रक्रिया चल रही है। अब तक सिर्फ एक लाख 16 हजार बच्चों का ही पंजीकरण हो सका है। प्रक्रिया ऑनलाइन होने की वजह से कई तरह की तकनीकी दिक्कतें सामने आ रही हैं। वहीं, कई अभिभावकों के आधार में त्रुटि होने व बिना लिंक वाले खातों में पैसा नहीं पहुंच पाएगा। इससे बच्चों को ड्रेस से वंचित होना पड़ सकता है।
डीबीटी एप पर बच्चों का डाटा अपलोड हो गया है, अब जिला स्तर पर पंजीकरण की प्रक्रिया चल रही है। तकनीकी दिक्कतों की वजह से समस्या आ रही है। नवंबर के पहले सप्ताह तक इस कार्य के पूरा होने की उम्मीद है।
- राकेश सिंह, बीएसए