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शिक्षामित्रों को न्याय न युवाओं को लैपटॉप, वादे जो पूरे नहीं हुए: यह था संकल्प पत्र

प्रदेश सरकार को साढ़े चार साल का कार्यकाल बीतने के बाद अब शिक्षकों की याद आई है। 2017 के चुनाव से पहले भाजपा के लोक कल्याण संकल्प पत्र में माध्यमिक शिक्षा विभाग के शिक्षकों के संबंध में किए गए संकल्प के अनुपालन और शिक्षकों के लिए नई कल्याणकारी योजनाओं की संस्तुति के लिए छह सदस्यीय समिति गठित की गई है। शिक्षा से जुड़े कई संकल्प ऐसे हैं जो पूरे नहीं हुए। न तो शिक्षामित्रों को न्याय मिला और न युवाओं को लैपटॉप बांटा जा सका।


संकल्प पत्र के पृष्ठ संख्या आठ पर लिखा था कि प्रदेश के सभी युवाओं को कॉलेज में दाखिला लेने पर मुफ्त लैपटॉप दिया जाएगा। कॉलेज में दाखिला लेने पर स्वामी विवेकानंद युवा इंटरनेट योजना के तहत हर महीने एक जीबी इंटरनेट मुफ्त देने की बात कही गई थी। जो अब तक सपना है। प्रदेश के सभी शिक्षामित्रों की रोजगार समस्या को तीन महीनों में न्यायोचित तरीकों से सुलझाने की बात कही गई थी। हालांकि सरकार बनने के बाद जुलाई 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने 1.37 लाख शिक्षामित्रों का सहायक अध्यापक पद पर समायोजन निरस्त कर दिया। शिक्षामित्रों ने आंदोलन किया तो उनका मानदेय 3.5 हजार से बढ़ाकर 10 हजार कर दिया गया।

यह था संकल्प पत्र

● सभी लड़कियों और 12वीं में 50 प्रतिशत से अधिक अंक पाने वाले लड़कों को स्नातक स्तर तक नि:शुल्क शिक्षा।

● गरीब परिवारों के छात्र-छात्राओं को 12वीं तक सभी किताबें, स्कूल यूनिफॉर्म, जूते व स्कूल बैग मुफ्त।

● यूपी में 10 नए अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विश्वविद्यालय और महामना पं. मदन मोहन मालवीय संस्कृत विवि की स्थापना।

● प्राथमिक शिक्षा से योग शिक्षकों को शारीरिक शिक्षक पद पर नियुक्ति।