फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी देने के मामले की जांच के घेरे में पूर्व बीएसए और बाबू भी

सिद्धार्थनगर। फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी देने के मामले में तत्कालीन बीएसए और काउंसिलिंग के दौरान काउंटर पर तैनात कर्मी भी पुलिस के रडार पर हैं। पुलिस उनसे भर्ती में हुए फर्जीवाड़े के संबंध में पूछताछ करेगी और उनका बयान भी दर्ज होगा। फर्जीवाड़े की तह तक जाने के लिए पुलिस ने तैयारी कर ली है। बयान नहीं देने वालों पर कार्रवाई भी होगी।

दूसरे के दस्तावेज के सहारे नौकरी देने के कई मामले जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में सामने आ चुके हैं। यहां वर्ष 1995 से शिक्षकों की भर्ती में फर्जीवाड़े का खेल चल रहा है। यह विभागीय के आंकड़े साबित कर रहे हैं। अभी हाल ही में छह शिक्षक पकड़े गए। इनमें वर्ष 1995 से नौकरी करने की बात सामने आ चुकी है। यहां तक की कई शिक्षक दूसरे जनपद स्थानांतरित हो चुके हैं तो कुछ लोग सेवानिवृत्त भी हो गए हैं। अगर तह तक जांच हो जाए तो बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक पकड़े जाएंगे। हालांकि पुलिस की सक्रियता यह बता रही है कि जल्द ही बड़ा पर्दाफाश होगा।

फर्जीवाड़ा से जुड़े हर कर्मी से पुलिस पूछताछ करेगी। बताया यह भी जा चुका है कि काउंसिलिंग के दौरान काउंटर बैठे 12 कर्मियों से पुलिस पूछताछ कर चुकी है। अभी भर्ती से जुड़े हर कर्मी से पूछताछ करके पुलिस उनका बयान दर्ज करेगी। इस मामले में तत्कालीन बीएसए से भी पूछताछ की जाएगी। इस संबंध में एएसपी सुरेशचंद रावत ने बताया कि फर्जी शिक्षकों की भर्ती मामले से जुड़े हर कर्मी से पूछताछ करके उनका बयान लिया जाएगा। इसमें सहयोग नहीं करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।
पटल सहायकों से भी होगी पूछताछ
शिक्षकों के फर्जीवाड़ा मामले में शिक्षक भर्ती के दौरान अन्य कर्मियों से पूछताछ करेगी। साथ ही पटल सहायक से भी भर्ती के संबंध में जानकारी लेगी। उनसे पुलिस यह जानकारी लेगी की किस आधार पर उनका चयन कर दिया गया। दस्तावेज की जांच किस प्रकार की गई। इसके अलावा भर्ती के समय तैनात तत्कालीन बीएसए से भी जानकारी लेगी कि उन्होंने इसमें जांच क्या की।
अब तक 109 की हो चुकी है बर्खास्तगी
जिले में फर्जी दस्तावेज के सहारे नौकरी करने के मामले का भंडाफोड़ 2017-18 में हुआ। फिर जांच हुई तो फर्जी शिक्षकों की लिस्ट लंबी होती गई। अब तक जिले में 109 शिक्षक बर्खास्त किए जा चुके हैं। इसमें पुलिस अधिकांश पर केस दर्ज कराया जा चुका है।