आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की बर्खास्तगी रद्द, बर्खास्त करने से पहले सुनवाई का मौका देना जरूरी, कोर्ट ने दिया सेवा परिलाभों सहित बहाली का निर्देश

प्रयागराज: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बगैर बर्खास्तगी अवैध है। चार्जशीट का दो दिन में जवाब देने का अवसर देना और जांच रिपोर्ट पर सुनवाई का मौका न देना पर्याप्त नहीं है। बर्खास्त करने से पहले सुनवाई का मौका देना जरूरी है। कोर्ट ने जिला कार्यक्रम अधिकारी बिजनौर के याची को बर्खास्त करने के

आदेश को रद करते हुए सभी परिलाभों सहित सेवा बहाली का निर्देश दिया है। साथ ही सरकार को नियमानुसार नए सिरे से आदेश देने की छूट दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शहाना परवीन की याचिका पर दिया है। याचिका पर अधिवक्ता अजीत कुमार ङ्क्षसह ने बहस की। कोर्ट ने कहा कि सरकार को याचिका का जवाब देने के लिए कई बार अवसर व अंतिम अवसर के बाद भी जवाब दाखिल नहीं किया गया। याचिका के कथनों को सही मानते हुए फैसला किया गया है। याची अधिवक्ता का कहना था कि वह एक जुलाई, 1983 से संविदा पर लगातार कार्यरत है। एक व्यक्ति को पुष्टाहार बेचने का आरोप लगाया गया। मामले की जांच दो सदस्यीय समिति ने की। कमेटी ने आरोप सिद्ध करार देते हुए बर्खास्तगी की संस्तुति की। जांच रिपोर्ट पर याची का पक्ष सुने बगैर उसे बर्खास्त कर दिया गया। उसे चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा बर्खास्त करने से पहले सुनवाई का मौका दिया जाना चाहिए था।