परिषदीय विद्यालय के सजायाफ्ता प्रधानाध्यापक को किया निलंबित, जानिए क्या होता है सजायाफ्ता का मामला

(संभल)। परिषदीय विद्यालय के सजायाफ्ता प्रधानाध्यापक को निलंबित कर दिया है। बदायूं के कारागार में दो बार निरुद्घ होने के बाद बीएसए की ओर से प्रधानाध्यापक के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई है।


जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी दीपिका चतुर्वेदी ने बताया कि बीते दिनों विकासखंड रजपुरा की ग्राम पंचायत भिरावटी निवासी सोनपाल सिंह पुत्र काले सिंह की ओर से जिलाधिकारी को प्रार्थनापत्र देकर शिकायत की गई थी कि ग्राम पंचायत मढ़ावली में तैनात प्रधानाध्यापक सजायाफ्ता होने के बावजूद नौकरी पर हैं। जिलाधिकारी के आदेश पर विकासखंड रजपुरा के खंड शिक्षा अधिकारी से पूरे मामले में जांच कराई गई। बीईओ की जांच आख्या में सामने आया कि आरोपी प्रधानाध्यापक रामनिवास पहली बार 25 मई 2015 से 14 अगस्त 2015 तक जिला कारागार बदायूं में निरुद्घ रहे थे। बाद में 31 जुलाई 2015 को उच्च न्यायालय के आदेश पर जमानत पर रिहा होने के बाद 15 अगस्त 2015 को प्रधानाध्यापक की ओर से कार्यभार ग्रहण किया गया।

बीएसए ने बताया कि प्रधानाध्यापक को थाना धनारी में विभिन्न धाराओं में दर्ज मामले में 8 मई 2017 को आजीवन कारावास व 30 हजार रुपये अर्थदंड तथा अर्थ दंड अदा न करने पर डेढ़ वर्ष के अतिरिक्त कारावास की सजा से दंडित किया गया। उन्होंने बताया कि प्रधानाध्यापक 25 मई 2015 से 14 अगस्त 2015 तथा 8 मई 2017 से 16 मई 2018 तक जिला कारागार में निरुद्घ रहे हैं तथा अब तक न्यायालय से दोष मुक्त नहीं है। इससे साफ है कि प्रधानाध्यापक के खिलाफ ग्रामीण की ओर से लगाया गया आरोप सही है। इसको लेकर प्रधानाध्यापक के खिलाफ उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद कर्मचारी वर्ग नियमावली, 1973 के बिंदु संख्या-04 (1) व (2) में निहित व्यवस्था के मुताबिक आरोप में दोषी पाए जाने पर निलंबन की कार्रवाई की गई है। बीएसए के बताया कि निलंबन की अवधि में प्रधानाध्यापक को कार्यरत विद्यालय से संबद्ध किया गया है।
पवांसा बीईओ को दी गई आगामी जांच की जिम्मेदारी
बहजोई। आगामी अनुशासनिक कार्रवाई के लिए विकासखंड पवांसा के खंड शिक्षा अधिकारी मुंशीलाल पटेल को नामित करते हुए निर्देश दिए गए हैं कि सप्ताह भर में आरोप पत्र तैयार कर बीएसए दफ्तर को उपलब्ध कराया जाए। संवाद