शिक्षामित्रों की मांगों पर नहीं बनी सहमति, सरकार केवल एक हजार रुपये मानदेय बढ़ाने को तैयार


लखनऊ। शिक्षामित्रों का मानदेय अधिकतम एक हजार रुपये तक बढ़ाने पर बात हुई, लेकिन नियमित करने समेत अन्य मांगों पर सहमति नहीं बन सकी।


बेसिक शिक्षा निदेशक सर्वेन्द्र विक्रम सिंह के साथ सोमवार को हुई बैठक में शिक्षा मित्रों के संगठनों ने मनरेगा के ग्राम रोजगार सेवकों की तर्ज पर कम से कम चार हजार रुपये मानदेय बढ़ाने की मांग की। उन्होंने शिक्षा मित्रों को किसी भी तरह स्थायी करने, उन्हें स्वास्थ्य बीमा का लाभ देने, आकस्मिक अवकाश बढ़ाने और सहायक अध्यापकों की तर्ज पर सुविधाएं देने की मांग की।सवेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि सरकार ने मानदेय बढ़ाने के लिए बजट प्रावधान किया है उसी के अनुसार बढ़ाया जाएगा। 2017 में मानदेय 3500 से बढ़ाकर 10,000 रुपये किया गया था। नियमित करने के मुद्दे पर निर्णय लेने का अधिकार मुख्यमंत्री को है। वहीं अन्य मांगों पर विचार के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।

उत्तर प्रदेश दूरस्थ बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश महामंत्री धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार शिक्षा मित्रों से किया वादा पूरा नहीं करना चाहती है। मानदेय भी अधिकतम एक हजार रुपये बढ़ाना चाहती है। इस दौरान बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव प्रताप सिंह बघेल और संयुक्त निदेशक गणेश कुमार मौजूद थे।