SIT को सौंपी जा सकती है यूपीटीईटी पेपर की जांच मामले


टीईटी पेपर लीक मामले में अलग-अलग जिलों में दर्ज हो रहे मुकदमे की जांच प्रदेश पुलिस के विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) को सौंपी जा सकती है। इस मामले में अभी शासन स्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ चयन आयोग की परीक्षा में हुई धांधली की जांच एसआईटी पहले से कर रही है। इसके अलावा वह सपा शासनकाल में जल निगम व सहकारिता विभाग की भर्तियों में हुई धांधली की जांच भी कर रही है।


टीईटी पेपर लीक मामले में एसटीएफ की इकाइयों ने अलग-अलग जिलों में अब तक कुल 10 मुकदमे दर्ज कराए हैं। इसमें गौतमबुद्धनगर, लखनऊ, प्रयागराज व वाराणसी में दर्ज कराए गए मुकदमे शामिल हैं। इसके अलावा बस्ती व अंबेडकरनगर में पुलिस ने भी केस दर्ज किए हैं। टीईटी पेपर लीक मामले की जांच में एसटीएफ की सभी इकाइयां जुटी हुई हैं। पेपर लीक से जुड़े दो प्रमुख अभियुक्तों से संबंधित मुकदमा गौतमबुद्धनगर के सूरजपुर थाने में दर्ज है। इसके अलावा सॉल्वर गैंग के लोग प्रयागराज में दर्ज मुकदमों में अभियुक्त हैं। सभी मुकदमों में पेपर लीक से जुड़े अधिकारी, सॉल्वर गैंग के सरगना व उसके सदस्य तथा सॉल्वरों की मदद लेने वाले अभ्यर्थी नामजद हैं। अभी संबंधित थानों की पुलिस के साथ मिलकर एसटीएफ ही मुकदमों की विवेचना कर रही है।

मौजूदा सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की जांच पूर्व में एसआईटी को सौंपी थी। वर्ष 2018 में हुई उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की परीक्षा में गड़बड़ी की जांच भी एसआईटी को सौंपी गई थी। मूल मुकदमा चयन सेवा आयोग के अवर सचिव राम नरेश प्रजापति की तहरीर पर अगस्त 2019 में लखनऊ के विभूति खंड थाने में दर्ज कराया गया था। ग्राम पंचायत अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी एवं पर्यवेक्षक समाज कल्याण के पदों पर भर्ती के लिए यह परीक्षा प्रदेश के 16 जिलों के 572 परीक्षा केंद्रों पर 22 व 23 दिसंबर 2018 को कराई गई थी।


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